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Uttar Pradesh

Mahayogi Gorakhnath University में President Droupadi Murmu का आगमन: Education, Environment और Culture का अद्भुत संगम

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महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 1 जुलाई को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिरकत की। इस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के लोकार्पण एवं शिलान्यास के लिए किया गया था।
इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक संस्थान के उद्घाटन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह शिक्षा, पर्यावरण और सेवा के मूल्यों को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल थी।

एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की प्रेरणादायक शुरुआत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया। उन्होंने इस कार्य को धरती माता और अपनी माँ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बताया।
यह अभियान लोगों को पर्यावरण के साथ भावनात्मक जुड़ाव और हरियाली बढ़ाने की दिशा में प्रेरित करता है।

गोरक्षपीठ की शिक्षा और सेवा क्षेत्र में ऐतिहासिक भूमिका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने संबोधन में कहा कि गोरक्षपीठ हमेशा से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोक-कल्याण के कार्य करती रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत आज 52 से अधिक शिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संचालित हो रहे हैं।

इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देना, बल्कि उन्हें संस्कार, सेवा और राष्ट्रप्रेम के भाव से जोड़ना भी है।

आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति का संगम

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना इस सोच के साथ की गई है कि यहां के छात्र आधुनिक टेक्नोलॉजी, शोध, और रोजगारोन्मुख शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों में भी रचे-बसे हों।

योगी आदित्यनाथ जी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के राष्ट्र प्रथमविजन के अनुरूप एक सशक्त कदम बताया।

विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं

समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, छात्रों और पूरे गोरक्षपीठ परिवार को बधाई दी और कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए शिक्षा का एक आदर्श केंद्र बनेगा।

यह दिन गोरखपुर के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय की शुरुआत नहीं, बल्कि एक ऐसे विचार का आरंभ है, जो शिक्षा, पर्यावरण और राष्ट्रसेवा को एक साथ जोड़ता है। इस विश्वविद्यालय से भविष्य में ऐसे छात्र निकलेंगे जो न सिर्फ योग्य होंगे, बल्कि समाज के लिए उपयोगी और संस्कारी भी होंगे।

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