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Himachal Pradesh

हिमाचल में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, अब बिजली बिलों में जुड़ा फ्यूल चार्ज

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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा चुनाव के दौरान किए गए 300 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। इसके उलट राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर नए-नए शुल्क और सेस का बोझ बढ़ता जा रहा है। अब सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार द्वारा फ्यूल चार्ज लागू किए जाने के बाद बिजली बिलों में अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। इस संबंध में बिजली बोर्ड ने 30 मई को अधिसूचना भी जारी की थी।

जानकारी के अनुसार, बिजली दरों के साथ ईंधन और बिजली खरीद लागत को जोड़ते हुए फ्यूल चार्ज लगाया गया है। जून में जारी मई माह के बिजली बिलों में यह नया शुल्क शामिल किया गया है। सोशल मीडिया पर कई उपभोक्ता अपने बिजली बिल साझा कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि फ्यूल चार्ज के कारण उनके बिलों में 50 से 150 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।

बिजली बोर्ड के अनुसार, करीब 100 यूनिट बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को लगभग 33 रुपये, 200 यूनिट खपत पर 67 रुपये और 300 यूनिट खपत पर करीब 100 रुपये अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना पड़ सकता है। खपत बढ़ने के साथ यह शुल्क भी बढ़ता जाएगा। इसका असर सभी वर्गों के उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ता पहले से ही विभिन्न प्रकार के सेस का भुगतान कर रहे हैं। इनमें मिल्स सेस भी शामिल है। इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली सब्सिडी का लाभ केवल दो मीटरों तक सीमित कर दिया गया है। ऐसे में सरकार के इस फैसले को लेकर लोगों में असंतोष देखने को मिल रहा है।

हालांकि सरकार 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का दावा करती है, लेकिन इसके साथ कई शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। यदि किसी उपभोक्ता की प्रतिदिन बिजली खपत 4 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो 125 यूनिट से कम खपत होने पर भी उसे बिल का भुगतान करना पड़ सकता है। इससे पहले सरकार ने 125 से 300 यूनिट तक मिलने वाली बिजली सब्सिडी भी बंद कर दी थी, जिसे बाद में दोबारा बहाल कर दिया गया।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली लगभग 5.89 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलती है। हालांकि सरकार इसमें करीब डेढ़ रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसके बावजूद नए फ्यूल चार्ज लागू होने से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

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