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पंजाब की शिक्षा में बदलाव की कहानी सरकारी फाइलों में नहीं, बल्कि अध्यापकों द्वारा लिखी जा रही है: मनीष सिसोदिया

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शिक्षक दिवस पर दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और आप पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने होशियारपुर में 200 से अधिक सरकारी स्कूल के अध्यापकों से बातचीत की और पंजाब के शिक्षा सुधारों को इस चर्चा के केंद्र में रखा। उन्होंने कक्षाओं में पढ़ाई के नतीजों में पंजाब के पहले स्थान पर रहने और भगवंत मान सरकार द्वारा अध्यापकों के प्रशिक्षण पर किए जा रहे निवेश का खास उल्लेख किया, जिसमें सिंगापुर, फिनलैंड और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) अहमदाबाद के प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।

टांडा के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 40 से बढ़कर 400 से अधिक होने और विद्यार्थियों द्वारा नीट और जेईई पास करने की मिसालें देते हुए, उन्होंने अध्यापकों को इस बदलाव का मुख्य स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि असल बदलाव कक्षाओं के अंदर हो रहा है, जहां अध्यापक पंजाब के विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और उम्मीदों को दोबारा जगा रहे हैं।

इस संवाद के दौरान, अध्यापकों ने अपने निजी अनुभवों, सामने आ रही चुनौतियों और विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, सपनों और उपलब्धियों में आ रहे बदलाव के बारे में चर्चा की।

दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने अध्यापकों को “समाज का पायलट” बताते हुए कहा, “जिस तरह एक पायलट पर विमान में सवार सभी यात्रियों की जान और मंजिल का भरोसा किया जाता है, उसी तरह एक अध्यापक पर पूरी पीढ़ी के भविष्य की दिशा का भरोसा होता है। हर डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर, उद्यमी, मंत्री और नेता पहले एक अध्यापक के हाथों से ही गढ़ा जाता है।”

मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भगवंत मान सरकार का सबसे बड़ा योगदान केवल बेहतर ढांचा तैयार करना ही नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल के अध्यापकों के मान-सम्मान, आत्मविश्वास और पेशेवर निष्ठा को बहाल करना है।

उन्होंने आगे कहा, “भगवंत मान सरकार ने अध्यापकों को प्रशासनिक श्रृंखला की आखिरी कड़ी नहीं, बल्कि पंजाब के बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण नेता माना है। जब कोई सरकार अपने अध्यापकों को सिंगापुर, फिनलैंड और आईआईएम अहमदाबाद भेजती है, तो यह सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं होता। यह एक बड़ा संदेश होता है कि हमारे अध्यापक दुनिया के बेहतरीन विचारों तक पहुंच के हकदार हैं क्योंकि पंजाब का भविष्य उनके हाथों में है।”

मनीष सिसोदिया ने कहा कि कक्षाओं में पढ़ाई के नतीजों में पंजाब का केरल जैसे पारंपरिक रूप से आगे रहने वाले राज्यों को पछाड़कर देश का नंबर 1 राज्य बनना किसी प्रचार या सरकारी आदेशों से नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “इस उपलब्धि का श्रेय सबसे पहले पंजाब के अध्यापकों को जाता है। सरकारें साधन, प्रशिक्षण और अनुकूल माहौल दे सकती हैं, लेकिन असल बदलाव कक्षा के अंदर, एक अध्यापक और बच्चे के बीच होता है।”

शिक्षा के बारे में अपना व्यापक दृष्टिकोण साझा करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि स्कूलों को विद्यार्थियों को सिर्फ परीक्षाएं पास करने और रोजगार प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि जिंदगी में जिम्मेदार फैसले लेने के लिए भी तैयार करना चाहिए। “ज्ञान और कौशल एप्लिकेशन्स जैसे हैं, लेकिन नैतिक मूल्य वह ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जिस पर व्यक्ति की पूरी जिंदगी चलती है। शिक्षा प्रणाली को युवाओं को करियर के लिए तैयार करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार को नकारने, नशे से दूर रहने, दूसरों का सम्मान करने और समाज की तरक्की के लिए अपनी क्षमताओं का उपयोग करने की शक्ति भी देनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ डिग्री धारक पैदा करके विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। इसे आत्मविश्वासी, सक्षम और संवेदनशील युवाओं की जरूरत है, और सिर्फ सशक्त अध्यापक ही ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं। “किसी बच्चे का नीट या जेईई पास करना, स्कूल में बच्चों की संख्या 40 से 400 होना, या किसी विद्यार्थी का पहली बार आत्मविश्वास से बोलना—ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। ये मिलकर सरकारी स्कूल प्रणाली द्वारा अपने अध्यापकों, विद्यार्थियों और समाज का भरोसा दोबारा जीतने की कहानी बयान करती हैं।”

मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकारों को अध्यापकों को सिर्फ शिक्षक दिवस पर ही याद करने से आगे बढ़ना चाहिए और उनके कक्षाओं के अनुभवों को सुनने के लिए नियमित मंच तैयार करने चाहिए। उन्होंने कहा, “बच्चों और क्लासरूम को सबसे गंभीरता से समझने वाले लोग अध्यापक ही हैं। कोई भी गंभीर शिक्षा नीति उनके साथ मिलकर बनाई जानी चाहिए, न कि सिर्फ उन पर थोपी जानी चाहिए।”

अध्यापक वर्ग को बधाई देते हुए मनीष सिसोदिया ने आगे कहा, “बजट से इमारतें बनाई जा सकती हैं और टेंडरों से तकनीक खरीदी जा सकती है, लेकिन बच्चे का भविष्य सिर्फ एक प्रेरित अध्यापक ही गढ़ सकता है। पंजाब के अध्यापक सिर्फ आज के विद्यार्थियों को नहीं पढ़ा रहे, बल्कि कल के पंजाब का निर्माण कर रहे हैं।”

अध्यापकों की कहानियां आ रहे बदलाव को करती हैं बयान

इस संवाद के दौरान पंजाब के सरकारी स्कूलों से बदलाव की कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आईं।

पीएम श्री सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कमाही देवी के प्रिंसिपल राजेश सिंह ने साझा किया कि कैसे उनके स्कूल के विद्यार्थी अब नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर रहे हैं। मनीष सिसोदिया ने कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब उन लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं जो कभी उनकी पहुंच से बाहर माने जाते थे।

सरकारी एलीमेंट्री स्कूल, बजवाड़ा की रमिंदर कौर ने बताया कि जीमैट और टॉफेल पास करने और विदेश जाने के मौके होने के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल अध्यापक बनना चुना। 14 सालों से अधिक के अध्यापन अनुभव के साथ, उनकी यात्रा पंजाब की सरकारी स्कूल प्रणाली में मौजूद प्रतिभा और समर्पण को दर्शाती है।

टांडा के सरकारी स्कूल के अध्यापक नरिंदर अरोड़ा ने बताया कि जब 40 से कम विद्यार्थियों वाले उनके स्कूल को दूसरे स्कूल में मिलाए जाने का खतरा था, तो अध्यापकों ने कैसे जवाब दिया। माता-पिता और स्थानीय समुदाय से लगातार संपर्क बनाकर, अध्यापकों ने दाखिले की संख्या 400 से अधिक कर दी।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “इसे कहते हैं ओनरशिप। इन अध्यापकों ने चंडीगढ़ से किसी आदेश की उम्मीद नहीं की। उन्होंने अपने स्कूल की जिम्मेदारी खुद ली और समाज का भरोसा जीता।”

अध्यापिका मोनिका ने सरकार की ‘रीडिंग कंप्रिहेंशन ऐप’ के प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में अंग्रेजी समझने, धाराप्रवाह बोलने और आत्मविश्वास से सवालों के जवाब देने की क्षमता में सुधार देखने को मिल रहा है, जो उनकी उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों को मजबूत करेगा।

इस कार्यक्रम में डिप्टी स्पीकर जै कृष्ण सिंह रौड़ी, डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन, सांसद राज कुमार छाबेवाल, विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा, जसबीर सिंह राजा गिल, एडवोकेट करमबीर सिंह घुम्मण और डॉ. ईशांक कुमार, मुकेरियां हलका इंचार्ज सरबजोत सिंह साबी, मेयर परवीन सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर सुरिंदर कुमार, डिप्टी मेयर संदीप कुमार मौजूद थे।

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