Connect with us

Punjab

पंजाब सरकार की बड़ी उपलब्धि: पिछले तीन वर्षों में 134 बच्चों को मिला कानूनी रूप से सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण

Published

on

पंजाब में बाल संरक्षण तथा बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाने की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री स.भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी-एसएआरए), पंजाब द्वारा आज ‘एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करने के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि राज्य का कोई भी बच्चा परिवार के स्नेह, देखभाल और सुरक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रतिबद्धता को एक अधिक मजबूत, पारदर्शी और बाल-केंद्रित व्यवस्था में परिवर्तित कर रही है, जो प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और उसके सर्वोत्तम हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है।

मंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (एसएए) स्थापित की गई है। वर्तमान में राज्य में कुल 26 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां सफलतापूर्वक कार्यरत हैं, जिनमें 16 सरकारी तथा 10 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) द्वारा संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पंजाब में अनाथ, परित्यक्त तथा सरेंडर किए गए कुल 87 बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाया गया है। इनमें से 66 बच्चों को देश के भीतर ही परिवार मिले, जिनमें 18 लड़के और 48 लड़कियां शामिल हैं, जबकि 21 बच्चों को विदेशों में गोद लिया गया, जिनमें 5 लड़के और 16 लड़कियां हैं। इसी अवधि के दौरान विशेष आवश्यकता (स्पेशल नीड्स) वाले 10 बच्चों को भी स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया।

इसके अतिरिक्त रिश्तेदारों तथा सौतेले माता-पिता (स्टेप-पेरेंट्स) के माध्यम से भी 47 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिया गया, जिससे कुल 134 बच्चों को स्थायी पारिवारिक सुरक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण प्राप्त हुआ। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित घर उपलब्ध कराने के प्रति राज्य सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के समयबद्ध पुनर्वास तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और कानूनी रूप से विनियमित बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) तथा स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से उपायुक्तों के प्रतिनिधि, सिविल सर्जनों/मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के प्रतिनिधि, बाल कल्याण समितियों के सदस्य, जिला बाल संरक्षण इकाइयों के अधिकारी, स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के अधिकारी तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) के प्रतिनिधि श्री सयम बिन खालिद ने एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022 के प्रमुख प्रावधानों, CARINGS पोर्टल के उपयोग, दस्तावेजीकरण, समयबद्ध कार्यवाही तथा विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही पीजीआई के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. भवनीत भारती ने बच्चों की चिकित्सीय जांच, स्वास्थ्य मूल्यांकन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान तथा उनके मेडिकल रिकॉर्ड के महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के दौरान आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा की गई, ताकि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़े सभी हितधारक कानूनी प्रावधानों और नवीनतम दिशा-निर्देशों से पूरी तरह अवगत और अद्यतन रह सकें।

इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक श्रीमती शेना अग्रवाल, विशेष सचिव श्री केशव हिंगोनिया तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित थे।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement