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FCI जीएम की नियुक्ति पर पंजाब व केंद्र में तकरार:CM मान का केंद्र को पत्र,फैसले पर पुनर्विचार

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पंजाब में फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के जनरल मैनेजर की नियुक्ति के इश्यू पर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच तकरार शुरू हो गई है। इस पद के लिए यूटी कैडर की अधिकारी नितिका पंवार के नाम की सिफारिश की गई है। नितिका AUGMT कैडर की अधिकारी हैं। इस पर CM ने कड़ी नाराजगी जताई है। CM ने इस बारे में केंद्र को पत्र लिखा है। उन्होंने इस फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है।

वहीं, पार्टी के प्रवक्ता का कहना है कि पंजाब अनाज का गोदाम नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। इस मुद्दे पर केंद्र को नए सिरे से विचार करना चाहिए। वहीं, पार्टी ने पंजाब बीजेपी को घेरा है। सवाल पूछा है कि क्या वह इस मामले में आवाज उठाएगी या हमेशा की तरह चुप रहेगी।

सीएम कहा दोबारा पैनल भेजने को तैयार

CM ने अपने पत्र में कहा कि यूटी कैडर के अधिकारी की नियुक्ति सालों पुरानी प्रशासनिक परंपरा और व्यावहारिक जरूरतों के खिलाफ है। रेगुलर नियुक्तियां केवल पंजाब कैडर से ही होती रही हैं। पंजाब की तरफ से पहले ही अपने अधिकारियों का पैनल भेजा जा चुका है। अगर नए अधिकारियों के पैनल की जरूरत है, तो वह तुरंत मुहैया करवाया जाएगा।

1965 में एफसीआई की स्थापना के बाद से अब तक पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारियों ने ही यह जिम्मेदारी संभाली है। अब तक कुल 37 अधिकारियों ने यह जिम्मेदारी निभाई है, जिनमें 23 रैगुलर नियुक्ति थी। यह सारे अधिकारी पंजाब कैडर के रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नील गर्ग ने पोस्ट से केंद्र व पंजाब बीजेपी पर उठाए सवाल।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नील गर्ग ने पोस्ट से केंद्र व पंजाब बीजेपी पर उठाए सवाल।

अनाज का गोदाम नहीं, देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़

पंजाब सिर्फ अनाज का गोदाम नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। लेकिन एफसीआई जैसे अहम संस्थान में दशकों पुरानी परंपरा तोड़कर पंजाब कैडर के अफसरों को जानबूझकर दरकिनार किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह मुद्दा उठाकर करोड़ों अन्नदाताओं की आवाज दिल्ली तक पहुंचाई है।

यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह संघीय ढांचे पर हमला है, राज्यों के अधिकारों की अनदेखी है और पंजाब के योगदान का अपमान है। सवाल साफ है कि क्या पंजाब की मेहनत की यही कीमत है? अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। क्या वह पंजाब की जायज़ मांग मानेगी या फिर अपना अड़ियल रवैया जारी रखते हुए पंजाब के हकों का हनन करेगी?

साथ ही सवाल यह भी है कि क्या पंजाब बीजेपी केंद्र के इस फैसले का विरोध करेगी या हमेशा की तरह पंजाब के साथ हुए अन्याय पर चुप्पी साधेगी?

पहले भी इन मुद्दों पर चल रहा विवाद

केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच नियुक्तियों को लेकर मुख्य विवाद चंडीगढ़ (संघीय क्षेत्र) से जुड़े रहे हैं। नवंबर 2025 में केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 240 में संशोधन का प्रस्ताव रखा, जिससे चंडीगढ़ में अलग लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) या प्रशासक की नियुक्ति संभव होती। इसको लेकर बवाल हुआ।

केंद्र ने उस समय जवाब दिया कि यह फैसाल नहीं लिया जा रहा है। फिर पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट व सिंडीकेट चुनाव को लेकर विवाद रहा।।चंडीगढ़ प्रशासन में UT/AGMUT कैडर अधिकारियों (SSP आदि) की नियुक्ति बढ़ाने पर भी विवाद रहा, जिसे पंजाब ने अपने कैडर अधिकारियों के हक का हनन बताया। इसी तरह BBMB में भी अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद चल रहा है।

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