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Sahibzada Zorawar Singh JI की जयंती, धर्म और साहस के प्रतीक का बलिदान

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दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के Sahibzada Zorawar Singh Ji की जयंती आज सिख समुदाय द्वारा श्रद्धा और आदर से मनाई जा रही है। बाबा जोरावर सिंह जी का जन्म 30 नवंबर 1696 को आनंदपुर साहिब में माता जीतो कौर जी के आंगन में हुआ। वह गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबज़ादों में से तीसरे पुत्र थे।

बाबा जोरावर सिंह जी और उनके छोटे भाई बाबा फतेह सिंह जी, जो उस समय क्रमशः 9 और 7 वर्ष के थे, ने इस्लाम कबूल करने के खिलाफ अद्वितीय साहस दिखाया। नवाब वजीर खान ने उन्हें बार-बार धमकियां और लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की, लेकिन दोनों साहिबज़ादों ने सच्चाई और अपने धर्म के लिए अडिग रहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया।

अंततः 26 दिसंबर 1704 को सरहिंद के क्रूर शासक वजीर खान ने उन्हें निर्दयतापूर्वक जिंदा दीवार में चुनवा दिया। यह घटना भारत में औरंगज़ेब के शासनकाल में धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार की चरम सीमा को दर्शाती है।

साहिबज़ादों के इस बलिदान ने पूरे सिख समुदाय और मानवता को निडरता और अपने धर्म के प्रति समर्पण की अमिट प्रेरणा दी। आज उनकी जयंती पर, सिख समाज उनके बलिदान और अद्वितीय साहस को याद करता है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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