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जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय की उम्मीद खत्म, मैं ना उनके सामने पेश हूंगा और ना दलील दूंगा- Kejriwal

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में चल रहे अपने केस में ना पेश होने और ना कोई दलील रखने का बड़ा फैसला किया है। सोमवार को उन्होंने यह जानकारी देते हुए कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है। इसलिए अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतों को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूंगा। इस बाबत मैंने उन्हें एक पत्र लिखकर सूचित भी कर दिया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैंने हितों के टकराव के कारण जज स्वर्ण कांता शर्मा को मेरे केस से खुद से हटने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने ने स्वयं ही मेरे केस को सुनने का फैसला दिया। इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जो भी फैसला सुनाएंगी, उस पर मैं अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हूं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और पूरा सम्मान करता हूं, क्योंकि जब मेरे खिलाफ साजिशें हुई तो न्यायपालिका ने ही मुझे दोष मुक्त करके न्याय दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जिंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब जीत या हार मायने नहीं रखते। उससे भी बड़ा सही और गलत का सवाल हो जाता है कि क्या सही है और क्या गलत है। ऐसे समय में हमें यह तय करना होता है कि हम मुश्किल रास्ता चुनेंगे या आसान रास्ता। आज मैं भी एक ऐसे मोड़ पर खड़ा हूं। सब जानते हैं कि मुझे एक झूठे केस में फंसाया गया। मुझे जेल भेज दिया गया। एक चुनी हुई सरकार को गलत तरीके से गिरा दिया गया। हमें कई महीने जेल में रखा, पर आखिरकार सच की जीत हुई। 27 फरवरी को अदालत ने मुझे पूरी तरह निर्दाेष घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल निर्दाेष है। केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए और जांच अधिकारी के खिलाफ एक्शन लेने के आदेश दे दिए। लेकिन सच का रास्ता आसान नहीं होता। सीबीआई ने तुरंत इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने लगा। तब मेरे मन में एक बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या उनके सामने मुझे न्याय मिलेगा? मेरे मन में यह प्रश्न क्यों आया, इसके कई कारण हैं, पर दो कारण मुख्य हैं। पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल डाला, जज साहिबा ने स्वयं माना है कि वह उस विचारधारा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के मंचों पर कई बार जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं। ऐसे में क्या उनके सामने मुझे न्याय मिल सकता है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दूसरा कारण हितों का टकराव है। कोर्ट में मेरे विपक्ष में केंद्र सरकार की सीबीआई है और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार में काम करते हैं। उनके दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने कोर्ट में दूसरी ओर से वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हैं। तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उन्हें कितने केस मिलेंगे, कौन से केस मिलेंगे, यह तुषार मेहता तय करते हैं। भारत सरकार के पैनल में लगभग 700 के करीब वकील हैं, लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस पाने वाले वकीलों में से एक हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच लगभग 5,904 केस मिले। इससे उनके बेटे को करोड़ों रुपए की फीस मिली। आज की तारीख में उन बच्चों का भविष्य और कमाई दोनों काफी हद तक तुषार मेहता पर निर्भर है। तो किसी के भी मन में यह चिंता स्वाभाविक है कि अगर जज साहिबा के बच्चों की कमाई और उनका भविष्य सामने खड़ा वकील तय कर रहा है, तो क्या जज साहिबा उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो हमारे देश की न्यायपालिका ने ही मुझे न्याय दिया था। जब मुझे झूठे केस में गिरफ्तार किया गया तो इसी न्यायपालिका ने मुझे बेल दी थी। इसी न्यायपालिका ने मुझे उसी झूठे केस में दोष मुक्त करार किया है। पिछले 75 वर्षों में जब-जब देश पर आंच आई, हमारे देश की न्यायपालिका ने देश को बचाया और नागरिकों के हितों की रक्षा की है। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे या उनके परिवार से किसी भी प्रकार की कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का एक बहुत बड़ा सिद्धांत है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। इसलिए मैंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से पूरे सम्मान के साथ अनुरोध किया कि वह हितों के टकराव जैसे कारणों की वजह से इस केस से खुद को अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और फैसला दिया कि वह स्वयं ही यह केस सुनेंगी।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज मेरे सामने सबसे आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके उनके सामने अपना केस लड़ूं। पर यह मुद्दा अब सिर्फ मेरे केस का नहीं है, बल्कि आम लोगों के न्याय प्रणाली पर भरोसे का है। ऐसी दुविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिखाया है। बापू ने कहा था कि जब भी किसी अन्याय का सामना करो तो उसका पहला कदम विरोध नहीं, बल्कि बातचीत होना चाहिए। अपनी बात अन्याय करने वाले के सामने पूरी विनम्रता के साथ रखनी चाहिए और उसे सुधारने का पूरा मौका देना चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी अगर न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की आवाज सुनो। यदि अंतरात्मा की आवाज कहती है कि न्याय नहीं हुआ तो शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए। फिर उसके जो भी परिणाम हों, वह सहर्ष स्वीकार करने चाहिए। पर इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी प्रकार की नफरत या गुस्सा नहीं होना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैंने भी बातचीत से शुरुआत की। पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने अपनी बात रखी। उन्हें इस केस से अलग होने के लिए याचना की। मैंने आग्रह किया कि मेरा केस हाई कोर्ट के किसी भी अन्य जज द्वारा सुन लिया जाए। लेकिन उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दी। उन्होंने फैसला दिया कि वे अपने आप को इस मामले से अलग नहीं करेंगी और यह केस वह स्वयं ही सुनेंगी। उनके दिए गए इस फैसले से मैं पूरी विनम्रता पूर्वक असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या उनके सामने मुझे न्याय मिलेगा? बापू के दिखाए रास्ते पर चलते हुए सत्याग्रह की भावना से अब मैंने फैसला किया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के कोर्ट में ना तो स्वयं पेश होऊंगा और ना ही मेरी तरफ से कोई वकील पैरवी करेगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जो भी फैसला सुनाएंगी, उस पर समय आने पर मेरे जो भी कानूनी अधिकार हैं, जैसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना आदि, वो सभी कदम लेने के लिए मैं स्वतंत्र हूं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह बात आज मैंने एक पत्र लिखकर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को भी सूचित कर दी है। मेरा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से किसी प्रकार का व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि भविष्य में भी कभी उनके सामने मेरा कोई अन्य केस लगता है जिसमें मेरे विरोध में भाजपा, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं, तो मैं उनके समक्ष जरूर पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि यदि मैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को मामले से अलग करने के आदेश से असहमत हूं तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा? मैं उसकी तैयारी कर रहा हूं। यह पूरा मामला बहुत नाजुक और संवेदनशील है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कानून को ध्यान में रखते हुए, न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखते हुए और लोगों के न्याय व्यवस्था पर भरोसे को ध्यान में रखते हुए एक-एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार या किसी विद्रोह या विरोध की भावना से नहीं उठा रहा। इस कदम के जरिए मेरा मकसद देश की कानून प्रणाली को चुनौती देना भी नहीं है और ना ही मेरा मकसद न्याय व्यवस्था का अपमान करना है। इसी केस में मैंने हर स्टेज पर हर अदालत में अपना पूरा सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। इसी न्यायपालिका की वजह से आज मैं आजाद घूम रहा हूं। मेरा सिर्फ और सिर्फ इससे एक ही मकसद है, देश की न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को और मजबूत करना और लोगों में अटूट विश्वास भरना कि जरूरत पड़ने पर हमारे देश की न्याय व्यवस्था से उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

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