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सरकार ने E-Commerce कंपनियों को जारी किया नोटिस, Bournvita Healthy drinks नहीं…!

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Ministry of Industry ने स्वास्थ्य पेय पर E-commerce कंपनियों को एक Adviser जारी की है। Ministry ने कंपनियों को चेतावनी जारी कर Bournvita और अन्य पीने वाले पदार्थों को Health Drink श्रेणी में शामिल नहीं करने को कहा है। मंत्रालय ने अपनी Adviser में कहा है कि सभी E-commerce कंपनियों को Bournvita समेत अपने प्लेटफॉर्म पर अपनी Website से healthy पीने वाले पदार्थो की श्रेणी से हटाना चाहिए।

मंत्रालय ने यह सलाह National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) की जांच के बाद जारी की है। दरअसल, NCPCR ने जांच में पाया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कोई Health Drinks नहीं है. ऐसे में सभी e-commerce कंपनियों या पोर्टल्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने प्लेटफॉर्म से Bournvita समेत Beverages को Healthy Beverages की श्रेणी से हटा दें।

इससे पहले April की शुरुआत में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी e-commerce खाद्य व्यवसाय ऑपरेटरों (FBos) को अपनी Website पर बेचे जाने वाले सभी खाद्य उत्पादों का उचित वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। FSSAI के अनुसार, ”Proprietary Food’ के तहत License प्राप्त खाद्य उत्पाद E-commerce वेबसाइटों पर डेयरी-आधारित पेय मिश्रण या अनाज-आधारित पेय मिश्रण की श्रेणी के तहत ‘स्वास्थ्य पेय’, ‘ऊर्जा पेय’ आदि की श्रेणी के तहत बेचे जाते हैं।

FSSAI अधिनियम 2006, नियमों और विनियमों के तहत स्वास्थ्य पेय की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है। उस स्थिति में, उन्हें स्वस्थ पेय या ऊर्जा पेय के रूप में लेबल न करें। FSSAI ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि गलत शब्दों का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है। ऐसे में इन ड्रिंक्स को Healthy drinks या Energy drinks में शामिल न करें। इसे इस श्रेणी से हटा देना चाहिए |

FSSAI ने स्पष्ट किया कि Energy Drinks के उपयोग की अनुमति केवल Carbonated और Non-Carbonated Water Drinks जैसे उत्पादों पर है। FSSAI का कहना है कि इस सुधारात्मक कार्रवाई का उद्देश्य उत्पाद की स्पष्टता और पारदर्शिता को बढ़ाना है ताकि उपभोक्ता किसी भी भ्रामक जानकारी के संपर्क में आए बिना सही विकल्प चुन सकें।

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Chennai: गोदी से गिरी थी बेटी, लोगो ने किया मां को खूब ट्रोल, अब ली अपनी जान

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सोशल मीडिया पर ‘कुछ भी लिख देने की आजादी’ का कड़वा सच सामने आया है। तमिलनाडु की राजधानी Chennai में एक महिला आईटी प्रोफेशनल ने सिर्फ इसलिए जान दे दी क्योंकि लोग उसे सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे थे। रम्या (33) पिछले महीने 28 अप्रैल को सात माह की बेटी को अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की गैलरी पर स्तनपान करा रही थी। तभी बच्ची फिसलकर पहली मंजिल के छज्जे पर गिर गई। 15 मिनट मशक्कत के बाद लोगों ने उसे बचा लिया था।

इस घटना का एक वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग बिना सही घटना जाने मां को जिम्मेदार ठहराते हुए ट्रोल करने लगे थे। यही रम्या के लिए जानलेवा बना। ट्रोलिंग से परेशान होकर दो हफ्ते पहले रम्या पति और दोनों बच्चों (5 साल के बेटे, 7 महीने की बेटी) के साथ मायके कोयंबटूर आई थी। रविवार को रम्या के माता-पिता, पति शादी में गए थे। वे घर लौटे तो रम्या को मृत पाया।

 डिप्रेशन में आ गई थी, बचने के लिए मायके गई, वहां भी पीछा नहीं छोड़ा

घटना के बाद से रम्या डिप्रेशन और तनाव से जूझ रही थी। उनका इलाज चल रहा था। स्थानीय चैनल भी लगातार बच्ची को बचाने वाले लोगों को हीरो और मां को लापरवाह बताने में तुले थे। इनसे बचने के लिए आईटी प्रोफेशनल पति अपनी पत्नी को लेकर कोयंबटूर स्थित उनके मायके चले गए थे। लेकिन वहां भी ट्रोलिंग चलती रही और रम्या ने सुसाइड कर लिया।

लोगो का लिखा और बोला हुआ दूसरों के लिए जानलेवा

सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख देने वालों और इस दुनिया की बातों को गंभीरता से लेने वालों के लिए यह घटना बहुत बड़ा सबक है। वर्चुअल स्पेस पर बिना सोचे समझे अपमानजनक और आक्रामक टिप्पणी करने का सीधा असर पीड़ित के मन पर पड़ता है। यह आभासी दुनिया लोगों को बेपरवाह और गैर जिम्मेदार बना देती है। किसी भी व्यक्ति को छलनी कर देने वाले शब्द सोशल मीडिया पर लिखकर उस पर लाइक्स और शेयरिंग के नंबर गिनने वाले ऐसे लाखों निर्दयी किरदार रोज न जाने कितने लोगों की जिंदगी में तनाव घोल रहे हैं।

लेकिन हम उन्हें ‘ट्रोलर’ मानकर और नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं। अंततः इनका दुस्साहस एक मां, एक संवेदनशील महिला और एक परिवार की तबाही का कारण बन जाता है। कोई जान दे देता है, कोई परेशान होकर जान ले लेता है, तो कोई डिप्रेशन में चला जाता है। इसलिए ऐसे तत्वों को पहले कदम पर ही पहचानकर इनसे कानूनी तरीके के निपटना चाहिए। ऐसी स्थिति में पीड़ित साइबर क्राइम सेल को फोन करे।

पुलिस में ऑनलाइन ही शिकायत भेज दें। सोशल मीडिया कंपनियों को भी ऐसे जानलेवा कंटेंट पर आपरधिक भागीदार करार देना चाहिए। हमें अपने परिवार, बच्चों व शुभचिंतकों को भी समझाना होगा कि उन्हें सोशल मीडिया कंटेंट को गंभीरता से लेने की जरूरत ही नहीं है। जो माध्यम भावनाएं नहीं समझता, जहां परिचित भी कई बार क्रूर होकर बुलीइंग करने लग जाते हैं, ऐसे माध्यम में अपरिचितों के कमेंट का मोल ही क्या है? हमें सोशल मीडिया के उपयोग में संयम और इसके असर से सतर्क रहने की जरूरत है।

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Pune: रईस जादे की रफ्तार ने ली दो लोगो की जान, निबंद लिखने की सुनाई सजा !

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Pune में कार चलाते समय एक नाबालिग ने दो इंजीनियरों की हत्या कर दी| हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसके साथी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने येरवडा पुलिस स्टेशन में कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन कुछ ही घंटों में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई. इसी बीच कोर्ट ने उन्हें घटना पर एक पैराग्राफ लिखने की सजा सुनाई|

नाबालिग का संबंध पुणे के एक नामी बिल्डर से है। हादसे में मारे गए लोगों की पहचान अनीस दुधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में हुई। दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं. हादसा रविवार देर रात 2.30 बजे हुआ| हादसे के बाद आरोपी ने भागने की कोशिश की लेकिन भीड़ ने उसकी पिटाई कर दी और फिर पुलिस को सौंप दिया |

14 घंटे के अंदर मिली जमानत

कार एक्सीडेंट के आरोपी को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 14 घंटे के अंदर जमानत दे दी, क्योंकि आरोपी नाबालिग था, इसलिए उसे पुणे के जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने आरोपी को चार शर्तों पर जमानत दी है| आरोपी को 15 दिन तक ट्रैफिक सिपाहियों के साथ ट्रैफिक पुलिस की मदद भी करनी होगी।आरोपी को मनोचिकित्सक से इलाज कराना होगा। यदि आरोपी को भविष्य में कोई दुर्घटना होती दिखे तो उसे दुर्घटना पीड़ितों की मदद करनी होगी। कोर्ट ने आरोपी को सजा के तौर पर ‘सड़क दुर्घटना का प्रभाव और उसके समाधान’ विषय पर कम से कम 300 शब्दों का निबंध लिखने का आदेश दिया|

आरोपी नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (लापरवाही) के तहत मामला दर्ज किया गया है| पुलिस को संदेह है कि वह गाड़ी चलाते समय शराब पी रहा था। इसलिए उनके खून की जांच की गई| हालांकि, इस टेस्ट की रिपोर्ट आने से पहले ही कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी| मामले में आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 3, 5, 199-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई है|

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Bihar: 4 साल के बच्चे का शव मिलने से परिजनों ने गुस्से में स्कूल को लगा दी आग

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Bihar की राजधानी पटना के दीघा इलाके में उस वक्त सन सनी फैल गई जब एक निजी स्कूल में गुरुवार से लापता स्कूली छात्र का शव नाले में मिला | बताया जा रहा है कि छात्र का शव स्कूल के नाले में मिला| मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पुलिस भी मोर्चे पर पहुंच गई| लोग गुस्से में हैं और सड़कें जाम कर रहे हैं| बता दें कि बच्चा कल से लापता था और लगातार उसकी तलाश की जा रही थी| छात्र की उम्र चार साल का थी | छात्र का शव मिलने के बाद आक्रोशित भीड़ की शक्ल में असामाजिक तत्वों ने जमकर उत्पात मचाया|

बतादें की असामाजिक तत्वों ने कानून अपने हाथ में लेते हुए पटना दानापुर रोड पर आगजनी की| दीघा एशियाना रोड भी जाम हो गया| कई स्कूल बसें रोकी गईं और पैदल यात्रियों के साथ मारपीट की घटनाएं भी हुईं| इतना ही नहीं गुस्साई भीड़ ने स्कूल में भी आग लगा दी | पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई है| स्कूल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है |

इस बीच स्कूल बिल्डिंग में लगी आग पर काबू पा लिया गया और 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है| परिजनों की शिकायत पर दीघा थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है| इस बीच पुलिस ने सभी लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की है|

वहीं सिटी एसपी ने बताया कि रात में छात्र के लापता होने की जानकारी मिली| मौके का सीसीटीवी फुटेज भी मिला जिसमें बच्चा जाता तो दिखा, लेकिन आता नहीं। इसलिए हम इसकी जांच हत्या के तौर पर करेंगे| फिलहाल तीन लोगों को हिरासत लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है |

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