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Haryana

Nuh जिले में जलभराव की समस्या, फंड की कमी से नहीं हो रहा समाधान

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मानसून खत्म हो गया और बारिश भी थम गई है, लेकिन Nuh जिले के दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ भूमि अभी भी भारी जलजमाव की जद में है। जैवंत गांव इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। ईटीवी भारत ने इस मुद्दे को उठाया था, और अब शुक्रवार को कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि विभाग के पास फंड की कमी के कारण जलभराव की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।

कई गांवों की स्थिति दयनीय: जिले के कई गांवों में भारी बारिश के कारण हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई है। इसके कारण किसान अपनी फसल नहीं बो पाए हैं। पुनहाना खंड के जैवंत गांव जैसे इलाके तो पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जहां गांव तक जाने के लिए ट्यूब की सहायता ली जा रही है। नूंह और इंडरी खंड के करीब 12 से अधिक गांवों की हालत और भी खराब है। 2022 में रबी की फसल की खराबी का मुआवजा भी अभी तक किसानों को नहीं मिल सका है, और अब सेम की समस्या ने किसानों के लिए और भी परेशानी खड़ी कर दी है। विधायक आफताब अहमद ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों और उपायुक्त नूंह से कई बार इस मुद्दे पर बैठक की, लेकिन समस्या अभी भी बरकरार है।

आफताब अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जलभराव की समस्या का समाधान करने के लिए सिंचाई विभाग के पास लगभग 8 करोड़ रुपये की कमी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मेवात क्षेत्र के प्रति उनकी सरकार की कोई गंभीरता नहीं दिख रही है। यहां के किसानों को न तो समय पर मुआवजा दिया जाता है और न ही जलभराव की समस्या का समाधान किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब तक जलभराव का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

“समस्या का समाधान करें विभाग”: उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि वे अपने खेतों में कृषि कार्य कर सकें। नूंह क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में जलभराव की समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है, और सबसे बड़ी बाधा फंड की कमी बताई जा रही है। अब यह देखना होगा कि सरकार सिंचाई विभाग को कब तक फंड उपलब्ध कराती है और कब तक किसानों के खेतों से जलभराव की समस्या समाप्त होती है।

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