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Karnataka में Voter Fraud का मामला गरमाया – Deputy CM D.K. Shivakumar ने Election Commission में दी औपचारिक शिकायत

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कर्नाटक में कथित वोटर फ्रॉड को लेकर सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में बेंगलुरु में हुए विरोध प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद ही राज्य के डिप्टी सीएम और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को औपचारिक शिकायत सौंप दी। इस शिकायत में उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान हुई कथित चुनावी गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

चुनाव आयोग ने मांगे सबूत

शिवकुमार की शिकायत मिलने के बाद CEO ने उनसे कहा कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत जरूरी दस्तावेज़ी सबूत और डिक्लेरेशन जमा करें, तभी आगे कार्रवाई संभव है। आयोग ने साफ किया कि शिवकुमार ने 5 अगस्त 2024 को दी गई अपनी रिप्रेज़ेंटेशन का हवाला दिया है, लेकिन उसके साथ कोई डॉक्यूमेंटरी प्रूफ नहीं जोड़ा गया।

शिवकुमार के आरोप – “वोट चोरी पूरे कर्नाटक में”

शिवकुमार ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ महादेवपुरा में नहीं बल्कि पूरे राज्य में हुई है। उन्होंने महादेवपुरा और गांधीनगर लोकसभा सीटों का उदाहरण देते हुए बताया कि—

  • एक ही व्यक्ति का नाम 5 से ज्यादा जगह दर्ज किया गया।
  • बिना घर नंबर के वोट रजिस्ट्रेशन हुए।
  • खाली प्लॉट को पते के रूप में इस्तेमाल किया गया।
  • वोट को एक बूथ से दूसरे बूथ में शिफ्ट किया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों के सबूत जल्द पेश करेगी और चुनाव आयोग से दोषी अधिकारियों को सख्त सज़ा देने की मांग की है, चाहे वो ब्लॉक लेवल ऑफिसर हो या रिटर्निंग ऑफिसर।

राहुल गांधी और खड़गे के शपथपत्र पर विवाद

EC ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके “वोट चोरी” वाले बयानों पर शपथपत्र मांगा है। इस पर शिवकुमार का कहना है—

“चुनाव लड़ते समय हम पहले ही शपथपत्र दे चुके हैं। दोबारा की ज़रूरत नहीं। अगर हम झूठ बोल रहे हैं तो मुझे फांसी दे दें। EC ने हमारे आरोप खारिज नहीं किए और न ही यह कहा कि हम झूठ बोल रहे हैं।”

6 महीने की जांच, AI टूल्स का इस्तेमाल

शिवकुमार ने बताया कि 20 लोगों की टीम ने 6 महीने तक महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में जांच की।
इस दौरान EC की मतदाता सूची में मौजूद फोटो को AI टूल्स की मदद से मिलाया गया, जिससे डुप्लीकेट, फर्जी और “घोस्ट” वोटर पकड़े गए।

शिकायत में रखी गई प्रमुख मांगें

  1. पूरे कर्नाटक की सभी लोकसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच।
  2. डिजिटल और मशीन-रीडेबल फोटो इलेक्टोरल रोल पब्लिक के लिए उपलब्ध कराना।
  3. जांच रिपोर्ट को पब्लिश करना, खासकर उन मतदाताओं की लिस्ट जो जोड़े गए, हटाए गए या बदले गए।
  4. यह देखना कि संदिग्ध वोटरों ने चुनाव नतीजों पर कितना असर डाला।
  5. फर्जी Form-6, Form-7, Form-8 पर साइन करने वाले अधिकारियों की पहचान, निलंबन और सज़ा।

शिवकुमार का कहना है कि कांग्रेस इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है।

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