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Uttar Pradesh

CM Yogi का आदेश, सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य किया जाए क्षमता निर्माण कार्यक्रम

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मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम अनिवार्य किया जाना चाहिए और इसे उनकी पदोन्नति और ACR (वापसी और भर्ती प्रक्रिया) से जोड़ा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने मिशन कर्मयोगी की प्रगति की समीक्षा की और कार्यक्रम को लागू करने के लिए भविष्य की कार्य योजना का आकलन किया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पहल है जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों में मानव संसाधन का विकास करना है, जिसमें भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा जाता है।

मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री की परिवर्तनकारी पहल

मंगलवार को हुई बैठक में क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान ने राज्य में मिशन कर्मयोगी के कार्यान्वयन की स्थिति पर एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री की एक परिवर्तनकारी पहल है। यह पहल भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप शासन को अधिक उत्तरदायी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।”

राज्य भर में लगभग 22 लाख कर्मचारी और शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत 5 लाख कर्मचारी इस योजना के लाभार्थी हैं। मिशन के तहत, देश भर में 790 से अधिक सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत और आधुनिक बनाया जा रहा है तथा सिविल सेवकों के सतत एवं व्यापक ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए iGOT (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित किया गया है। iGOT प्लेटफॉर्म विश्व का सबसे बड़ा सरकारी क्षमता निर्माण प्लेटफॉर्म है, जिस पर 14.5 करोड़ से अधिक यूजर्स पंजीकृत हैं।

सरकार इसके माध्यम से 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रही है, जिनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिंदी में और 540 से अधिक पाठ्यक्रम 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में शामिल हैं। 67 लाख से अधिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जिनकी सफलता दर 70% से अधिक है। iGOT ऐप को 5 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

18 लाख से अधिक कर्मियों ने कराया पंजीकरण

उत्तर प्रदेश में, राज्य के 18 लाख से अधिक कर्मियों ने इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है, जो 2025 में देश भर में कुल पंजीकरण का 93% है। राज्य के 10 लाख से अधिक यूजर्स ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किया है, जबकि राज्य में कुल 72 लाख पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं, जो 2025 में देश भर में कुल पाठ्यक्रम पूरा होने का 99% है।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों और सरकारी संस्थानों को आवश्यकता-आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने और उन्हें iGOT पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा, “राज्य में संचालित सभी प्रशिक्षण केंद्रों, जिनमें UPAM भी शामिल है, को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम विकसित करने होंगे, ताकि नए प्रशिक्षणार्थियों की काम करने की क्षमता शुरू से ही बेहतर हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा को सभी विभागों और सरकारी संस्थानों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।”

सीएम योगी ने इस बात पर जोर दिया कि iGOT का केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ दुनिया भर और उत्तर प्रदेश की बेहतरीन केस स्टडी को शामिल करता है। यूपी के विभागों को भी अपनी अच्छी कार्यप्रणालियों और केस स्टडी इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड करनी चाहिए। नवोन्मेषी सोच और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक सेवा वितरण में वास्तविक सुधार केवल ज्ञान, कौशल और सकारात्मक मानसिकता के एकीकरण के माध्यम से ही संभव है।

मिशन कर्मयोगी जनभागीदारी को बढ़ावा देता है- सीएम योगी

उन्होंने कहा, “मिशन कर्मयोगी कार्य संस्कृति को मजबूत करता है और जनभागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की समयबद्ध और प्रभावी पूर्ति सुनिश्चित होती है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वे लाभकारी हों। । उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न विभागों के इंजीनियरों के लिए क्षमता-विकास कोर्स तैयार किए जाएं, जिससे वे नई डिजाइन और उभरती तकनीकों की जानकारी हासिल कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत ANM, आशा कार्यकर्ताओं, पुलिस कांस्टेबलों, पंचायती राज संस्थाओं के कर्मियों और शहरी स्थानीय निकाय के फील्ड स्टाफ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और जमीनी स्तर पर दक्षता और संवेदनशीलता को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक, कार्य-उन्मुख और आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

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