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स्पीकर कुलतार सिंह संधवा द्वारा पंथक मर्यादा की रक्षा के लिए एकजुट होने का न्यौता, SGPC में पारदर्शिता औऱ जवाबदेही की मांग 

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पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने गुरुवार को सिख संगत को पंथक मर्यादा की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही समय की मुख्य ज़रूरत है। सिख संस्थाओं के प्रबंधकों को लेकर बढ़ रही चिंताओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब सामूहिक आत्मनिरीक्षण और सुधारात्मक कार्रवाई का समय आ गया है।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने कहा कि मैं संगत और पंथक क्षेत्रों से अपील करता हूं कि वे पंथक मर्यादा की रक्षा के लिए इक्ट्ठे हों। एसजीपीसी में पारदर्शिता और जवाबदेही आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
एसजीपीसी की कार्यप्रणाली बारे बात करते हुए कुलतार सिंह संधवा ने कहा कि हालांकि एसजीपीसी गुरुद्वारा साहिबों के प्रबंधकों के लिए एक बहुत ही ज़िम्मेदार और सम्मानित संस्था है, लेकिन पिछले कुछ दशकों से की कार्यप्रणाली पर बार-बार सवाल उठाए जाते रहे हैं।

संधवा ने आगे कहा कि पंथक जागरूक आवाज़ें समय-समय पर चिंताएं प्रकट करती रही हैं। ज्ञानी रघबीर सिंह जी द्वारा हालिया खुलासों और भाई साहिब भाई रणजीत सिंह जी द्वारा पहले उठाए गए मुद्दों ने एक बार फिर गंभीर मामलों को सामने ला दिया है।

खास मुद्दों पर सवाल उठाते हुए कुलतार सिंह संधवा ने कहा कि गुरुद्वारे की ज़मीनों, गुरु दी गोलक और पूरे इंतज़ाम से जुड़े मामलों में गड़बड़ियां देखी गई हैं, लेकिन कमियों को ठीक करने के बजाय, आवाज़ उठाने वालों पर ही कार्रवाई की गई। सच बोलने वालों को चुप कराने के लिए ट्रांसफर, नौकरी से निकालना और केस तक किए गए, जबकि सच सामने लाने वाले को ही गुनहगार साबित करने की कोशिश की गई।

स्पीकर ने कहा कि इन खुलासों के बाद एसजीपीसी पर काबिज एक खास परिवार की भूमिका पर तीखे सवाल उठे हैं। अपने ही संस्थान, गोलक और पंथ का राजनीतिक फायदे के लिए गलत इस्तेमाल करना बिल्कुल मंज़ूर नहीं है। कथित ज़मीन घोटाले, लंगर की रोटियों और 328 सरूपों से जुड़ी गड़बड़ियों जैसे संवेदनशील मुद्दे अब ध्यान भटकाने वाले नहीं होने चाहिए।

मौजूदा हालात को अहम मोड़ बताते हुए संधवा ने कहा कि यह अहम समय है। पूरे पंथ को एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठानी चाहिए और सरबत खालसा की भावना के तहत इकट्ठे होना बिल्कुल जायज है। अगर पंथ को नुकसान पहुंचता है, तो पंजाब को नुकसान होता है, अगर पंथक संस्थाएं कमजोर होती हैं. तो समाज कमजोर होता है। गुरु घर की मर्यादा और संपत्ति की रक्षा के लिए जागरूकता और एकता बहुत जरूरी है।

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