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Punjab News: भगवंत मान सरकार ने माइनिंग सेक्टर में किए ऐतिहासिक सुधार, अवैध खनन पर सख्ती और सस्ती सामग्री पर जोर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य के माइनिंग सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े और ऐतिहासिक सुधार किए हैं। इसके तहत पंजाब माइनर मिनरल पॉलिसी में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई है, जिनका उद्देश्य कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, अवैध खनन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना, उपभोक्ताओं को राहत देना, राज्य का राजस्व बढ़ाना और एकाधिकार को खत्म करना है।
विभिन्न स्तरों पर हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद इन संशोधनों को कैबिनेट की मंजूरी दी गई है। नई नीति के तहत नई माइनिंग श्रेणियां, आधुनिक ऑनलाइन नीलामी प्रणाली और सरल रेगुलेटरी प्रक्रियाएं लागू की गई हैं, जिससे माइनिंग सेक्टर में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
माइनिंग मंत्री बरिंदर कुमार गोयल का बयान
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि सरकार माइनिंग सेक्टर की जटिलताओं को खत्म करने और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनता के हित में सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगेगी।
अवैध खनन की समस्या और सरकार की रणनीति
पिछले कई वर्षों से पंजाब में केवल 35 के करीब अधिकृत खदानें ही संचालित थीं, जबकि सड़क, आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए मांग कहीं अधिक थी।
इस अंतर ने अवैध खनन और गैर-नियंत्रित सप्लाई चैन को बढ़ावा दिया।
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने अवैध गतिविधियों को दबाने के बजाय खनन को कानूनी दायरे में लाने की रणनीति अपनाई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि माइनिंग जारी रहेगी, लेकिन पूरी तरह पारदर्शी, कानूनी और मंजूरियों के साथ।
🔹 क्रशर माइनिंग साइट्स (CRMS): स्थानीय उद्योग को मजबूती
नई नीति के तहत क्रशर माइनिंग साइट्स (CRMS) की शुरुआत की गई है।
अब क्रशर मालिक, जिनके पास बजरी युक्त जमीन है, माइनिंग लीज़ लेकर खुद खनन कर सकेंगे।
इससे होंगे ये फायदे:
- बजरी और रेत की उपलब्धता बढ़ेगी
- अन्य राज्यों पर निर्भरता घटेगी
- अवैध अंतर-राज्यीय खनिज आवाजाही पर रोक
- रोजगार के नए अवसर
- राज्य की आय में वृद्धि
- उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कमी
🔹 लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स (LMS): किसानों को सशक्तिकरण
सरकार ने लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स (LMS) की शुरुआत की है, जिससे भूमि मालिक खुद या अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से अपनी जमीन से रेत खनन कर सकेंगे।
LMS से लाभ:
- कानूनी माइनिंग साइट्स की संख्या बढ़ेगी
- रेत की आपूर्ति बेहतर होगी
- राज्य का राजस्व बढ़ेगा
- उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर सामग्री
- माइनिंग में एकाधिकार खत्म होगा
🔹 मंजूरियों में तेजी, उद्योग को राहत
पहले पर्यावरणीय मंजूरियों में 7–9 महीने या कई साल लग जाते थे।
अब इन प्रक्रियाओं को मिशन मोड में लाया गया है और कई मंजूरियां एक साथ निपटाई जा रही हैं।
सरकार को अब तक:
- 290 आवेदन (CRMS और LMS के तहत)
- 26 लेटर ऑफ इंटेंट जारी
- 200+ नई माइनिंग साइट्स चिन्हित
इनमें से अधिकांश खदानें दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच चालू होने की उम्मीद है।
🔹 तीन साल बाद पहली पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया
पिछले तीन वर्षों में पहली बार सरकार ने खुली और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन नीलामी शुरू की है।
पहले चरण में:
- 29 साइट्स नीलाम
- 16 सफल बोलियां
- ₹11.61 करोड़ का राजस्व
नई नीलामी प्रणाली में शामिल हैं:
- मूल्य-आधारित बोली
- अग्रिम रॉयल्टी भुगतान
- 5 साल की लीज़ अवधि
- सट्टेबाजी पर रोक
- पर्यावरणीय मंजूरी की स्पष्ट जिम्मेदारी
आने वाले समय में 100 से अधिक साइट्स नीलामी में लाई जाएंगी।
