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Punjab

चढ़ावा चोरी करने वाले बड़े लोगों को बचाया जा रहा-केज़रीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या श्रीराम मंदिर में हुई चोरी मामले में छोटे-छोटे लोगों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी करने वाले बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। राम मंदिर में 200 करोड़ रुपए की चोरी हुई और बरामद सिर्फ 80 लाख रुपए हुए, बाकी पैसा कहां गया? उन्होंने कहा कि चोरी में शामिल बड़ी मछलियां खुलेआम घूम रही हैं और जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। पुलिस ने गिरफ्तार उन 8 छोटे-छोटे लोगों को रिमांड पर लेकर पूछताछ भी नहीं की। मंदिर से चढ़ावे की चोरी का पैसा कहां और किसके पास है, इसकी जांच होनी चाहिए।

रविवार को अमृतसर में प्रेसवार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे की चोरी मामले में सभी आरोपियों को नहीं, बल्कि छोटे-छोटे लोगों को पकड़ा गया है। जो मुख्य और बड़े-बड़े लोग हैं, जिन पर सबसे ज्यादा आरोप लग रहे हैं, वे तो खुलेआम घूम रहे हैं। किसी पैसे गिनने वाले या किसी छोटे से चौकीदार को पकड़ लिया गया है। जिन आठ लोगों को पकड़ा गया है, वे बहुत छोटे स्तर के हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गिरफ्तार लोगों की पुलिस रिमांड भी नहीं ली गई है और पुलिस ने उनसे कोई पूछताछ भी नहीं की। जिन लोगों को पकड़ा गया, उनसे यह तो पूछना चाहिए था कि उन्होंने कितनी चोरी की, पैसा किसके पास पहुंचाया और कहां छिपाया? लेकिन पुलिस ने कोई पूछताछ नहीं की, उनकी रिमांड ही नहीं ली और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि दो-चार दिन में इनकी बेल करा दी जाएगी।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह पूरी कवायद सिर्फ इस मामले को छिपाने, लीपापोती करने और ढकने की कोशिश है। ऐसा लगता है कि यहां चोरी बहुत बड़े स्तर पर हुई है। एक आरोप यह भी है कि 200 करोड़ रुपए का कैश चोरी हुआ है, लेकिन इन आठ लोगों से केवल 80 लाख रुपए की रिकवरी हुई है। बाकी का पैसा कहां गया? मैं बार-बार यह कह रहा हूं कि चोरी का पैसा कहां गया, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

उधर, भगवंत मान ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार जो कर रही है, भाजपा उसका राजनीतिकरण कर रही है। धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिकरण बिल्कुल नहीं होना चाहिए। उन्होंने पटियाला के काली देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां का ट्रस्ट डीसी के अंडर है, लेकिन उसमें सरकार ने केवल उन्हीं स्थानीय लोगों को रखा है जिनकी धर्म में गहरी आस्था है। जिस रामतीर्थ की बात हो रही है, उसका भी एक ट्रस्ट है जो डीसी के अंडर है, लेकिन उसमें बाबा प्रगट नाथ जी और वाल्मीकि समाज के अन्य महापुरुषों को ही जगह दी गई है। धर्म का संचालन केवल धार्मिक, गुणी और ज्ञानी लोगों द्वारा ही किया जाना चाहिए। राजनीति और धर्म को हमेशा एक-दूसरे से अलग रखना चाहिए।

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