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लाल सागर में एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे ईरान-अमेरिका, किस हद तक जा सकती है दोनों की लड़ाई?

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लाल सागर में तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी युद्धपोत अल्बोर्ज को समंदर में उतार दिया है. दोनों देश एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे हैं. अमेरिका-ईरान के बीच दुश्मनी से दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी. लाल सागर में एक तरफ हूती और ईरान होंगे, दूसरी ओर अमेरिका और नाटो. ब्रिटेन ने भी युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है.

रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा जंग के बीच लाल सागर में बारूदी बवंडर उठा है. पिछले दो महीनों से सुलग रहे लाल सागर में जल्द परमाणु सुनामी की आशंका बढ़ गई है. हूती ने पश्चिमी देशों से सीधी जंग का ऐलान किया है. अमेरिका ने भी विनाशकारी तैयारी कर ली है. उधर ईरान ने भी लाल सागर में अमेरिकी घेरेबंदी कर दी है. ईरान ने युद्धपोत अल्बोर्ज को समंदर में उतार दिया है. यानी लाल सागर से महाविध्वंसक रण शुरू होने वाला है, जिसमें एक तरफ हूती और ईरान होंगे, दूसरी ओर अमेरिका और नाटो. ब्रिटेन ने भी युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है.

दरअसल, ईरान हूती विद्रोहियों को बचाने की कोशिश कर रहा है. वे लाल सागर में अमेरिका के निशाने पर हैं. ईरान के इस कदम के बाद उसका अमेरिका से तनाव और बढ़ जाएगा. दुनिया दो भागों में बंट जाएगी. अमेरिका के साथ पश्चिमी देश और NATO होंगे. दूसरी ओर ईरान को रूस-चीन और मुस्लिम देशों से समर्थन मिलेगा.

ईरान ने जिस युद्धपोत को समंदर में उतारा है उसपर 8 एंटी शिप मिसाइल तैनात हो सकती हैं. इस वॉर शिप को जाल नाम से भी जाना जाता है. मार्च 1971 में ईरानी की नेवी में ये शामिल हुआ था. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा अमेरिका और ब्रिटेन ने लाल सागर में अस्थिरता बढ़ाई है. अमेरिकी एक्शन से समंदर में सुरक्षा चिंता बढ़ी है. अमेरिका की कार्रवाई से इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ेगा. उधर, लाल सागर में हूती पर एक्शन के लिए ब्रिटेन भी तैयार है. ब्रिटेन के रक्षा सचिव ग्रांट शाप्स का दावा है कि हूती विद्रोहियों पर ब्रिटेन हमला करेगा. लाल सागर में हालात गंभीर हैं. हूती के हमलों से ब्रिटेन पर भी असर पड़ा है.

अमेरिका ने मार गिराए कई लड़ाके

ईरान की वॉरशिप की तैनाती से पहले अमेरिका ने रविवार को दावा किया था कि उसने लाल सागर में एक मालवाहक जहाज पर हमला होने के बाद हूती विद्रोहियों पर गोलीबारी की जिसमें उसके कई लड़ाके मारे गए. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि हम आत्मरक्षा में कार्रवाई करने जा रहे हैं.

अमेरिकी मध्य कमान ने कहा कि यूएसएस ग्रेवली विध्वंसक पोत के चालक दल के सदस्यों ने पहले शनिवार देर रात को सिंगापुर के ध्वज वाले एक जहाज पर हमला करने वाली दो जहाज रोधी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सिंगापुर के जहाज पर दक्षिणी लाल सागर में हमला किया गया था. अमेरिकी नौसेना ने बताया कि इसके बाद चार छोटी नौकाओं ने रविवार सुबह छोटे हथियारों से फिर उसी मालवाहक जहाज पर हमला किया और विद्रोहियों ने जहाज पर चढ़ने की कोशिश की. हूती ने संघर्ष में अपने 10 लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की है.

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एयर इंडिया की Flight में हुई सामने बड़ी लापरवाही, खाने में से निकला ब्लेड

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एयर इंडिया की बेंगलुरु सैन फ्रैंसिस्को जाने वाली Flight में बड़ी लापरवाही देखने को मिली है| दरअसल इस फ्लाइट के एक यात्री ने अपने लिए खाना मंगवाया और खाने में बड़ा ब्लेड निकला है | मामला सामने आने के बाद एयर इंडिया ने अपनी गलती स्वीकारी है| एयर इंडिया का कहना है कि ब्लेड फूड प्रोसेसिंग यूनिट का है|

जानकारी के मुताबिक, मैथर्स पॉल नाम के एक यात्री ने एयर इंडिया की इस फ्लाइट में भुने हुए शकरकंद और अंजीर की चाट का ऑर्डर किया था| पैसेंजर खाना खा रहा था कि अचानक मुंह में एक ठोस चीज आई, जब उन्होंने निकाल कर देखा तो वह ब्लेड थी| उन्होंने फौरन उसे थूक दिया |

Flight के खाने की सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीर

पीड़ित यात्री ने इस खाने की तस्वीर एक्स पर शेयर की और लिखा, “एयर इंडिया का खाना चाकू की तरह काट सकता है| इसके भुने हुए शकरकंद और अंजीर की चाट में एक ब्लेड का टुकड़ा था| खाने के साथ ये मुंह में गया तो इसका पता चला| शुक्र है कि कोई नुकसान नहीं हुआ.”

ये कोई पहला मामला नहीं है जब खाने में से कुछ न मिला हो | कई यात्रिओ को खाने के साथ साथ कभी छिपकली, कॉक्रोच, तो कभी बासी खाना परोसा जाता है | और अब तो हद ही हो गई खाने में बलेड निकल गया | वो तो वक्त रहते पैसेंजर ने ब्लेड अपने मुँह से निकला दिया वरना कोई हादसा हो सकता था |

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Bengaluru: छोटी उम्र में किया बड़ा कमाल! दुनिया कर रही इस लड़की को सलाम

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जिस उम्र में बच्चे खेलकूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में एक भारतीय लड़की ने कमाल कर दिखाया है | उसने विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दरअसल Bengaluru की रहने वाली 12 साल की कैना खरे के नाम फिलहाल दुनिया की सबसे कम उम्र की स्कूबा मास्टर गोताखोर बनने का रिकॉर्ड है। कयना खरे ने खुद अपने सफर का वर्णन किया है| जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे 10 साल की उम्र में उनका सफर शुरू हुआ| कयना की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की बेटियां मौका मिलने पर किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं।

कयना खरे कहती हैं कि ‘मैंने 10 साल की उम्र में स्कूबा डाइविंग शुरू कर दी थी। मैंने पहली बार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्कूबा डाइविंग की कोशिश की और यह एक मजेदार अनुभव था। फिर मैंने बाली, इंडोनेशिया में अपना ओपन वॉटर कोर्स पूरा किया और फिर मैंने थाईलैंड में अपना एडवांस्ड ओपन वॉटर कोर्स किया। मैं आधिकारिक तौर पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक मास्टर गोताखोर बन गया हूं… पानी के भीतर रहना मेरे लिए बहुत शांत और आरामदायक है।’

मेरे माता-पिता ने इस यात्रा में मेरा बहुत समर्थन किया है… मैंने तैराकी और स्कूबा डाइविंग में कुछ पुरस्कार जीते हैं, जिसे मैं एक मजेदार खेल मानती हूं… समुद्र में तमाम खतरों के बावजूद, मैं बिल्कुल भी नहीं डरती,” कयना खरे बताती है की । हाँ भारत में, मैंने मालदीव, बाली और थाईलैंड के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्कूबा डाइव की है… अब मैंने दुनिया में सबसे कम उम्र के मास्टर गोताखोर होने का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है… आप कभी नहीं जान सकते कि पानी के नीचे क्या होने वाला है और यह सबसे अच्छी बात है… मैं समुद्र विज्ञान पढ़ना चाहती हूं क्योंकि मुझे समुद्र से प्यार है।’

छोटी सी उम्र कुछ कर दिखाना उसका अलग ही मजा है | क्यूंकि छोटी सी उम्र में ही लोक जानने पहचाने लगते है | दुनिया में बहुत से बच्चे है जो अपने टैलेंट के दम पर अपना नाम बना लेते है | ऐसे ही कयना खरे है जिसने छोटी सी उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया और अपना नाम दुनिया की सबसे कम उम्र की स्कूबा की मास्टर डाइवर बन कर रिकॉर्ड अपने नाम किया है |

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सब्जियों पर Goverment की रहने वाली है नज़र, अधिक भाव बढ़ने पर देगी दखल

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नई दिल्ली देश में बढ़ती खाद्य महंगाई सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है| खाद्य महंगाई पर काबू पाने के लिए Government अब आवश्यक वस्तुओं की सूची में 16 नए नाम जोड़ने पर विचार कर रही है, Government सब्जियों को भी निगरानी सूची में डालने की योजना बना रही है| सरकार आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखती है। ट्रैक रखने से उनकी दर में उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। इसके अलावा, जब कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तो सरकार भी दरों को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक सब्जियों की कीमतों में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। इसलिए, मूल्य निगरानी के लिए सब्जियों को 16 नई संभावित वस्तुओं में शामिल किया जा सकता है। वर्तमान में सरकार की निगरानी सूची में 22 वस्तुएं हैं। 16 और वस्तुएं जुड़ने से इनकी संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी।

सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के बदलाव पर नज़र रखती है। इससे सरकार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर उनके प्रभाव का आकलन करने में सक्षम होगी। इन वस्तुओं की थोक और खुदरा कीमतें देश भर के 167 केंद्रों से प्रतिदिन एकत्र की जाती हैं और उनका विश्लेषण किया जाता है। जब आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार हस्तक्षेप करती है और कीमतों को नियंत्रित करती है।

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