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INDIA Alliance से बाहर हुई AAP: Sanjay Singh बोले- Congress की वजह से लिया Decision

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आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए खुद को INDIA गठबंधन (Indian National Developmental Inclusive Alliance) से अलग कर लिया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी और कहा कि INDIA गठबंधन न तो एकजुट रह पाया, न ही अपने मकसद को आगे बढ़ा पाया।

यह गठबंधन करीब दो साल पहले, जुलाई 2023 में, भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले NDA को 2024 लोकसभा चुनाव में टक्कर देने के लिए बनाया गया था। लेकिन चुनाव के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं।

कांग्रेस पर लगाया आरोप

संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की वजह से AAP को यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने विपक्षी दलों को एकजुट रखने की कोई कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा, “INDIA गठबंधन ने चुनाव के बाद एक भी बैठक नहीं की। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को बाकी दलों को साथ लेकर चलना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।”

AAP अब अकेले लड़ेगी चुनाव

संजय सिंह ने कहा कि AAP अब आगामी बिहार चुनाव समेत सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि भले ही अब पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में जनता के मुद्दे मजबूती से उठाएगी और सरकार का विरोध तब करेगी जब वो गलत होगी।
उन्होंने कहा, हम हमेशा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाते आए हैं और आगे भी निभाएंगे। INDIA गठबंधन चाहे तो अपनी मीटिंग करे और जैसे चाहे फैसले ले। AAP अब इसका हिस्सा नहीं है।”

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि AAP का बाहर होना ही INDIA गठबंधन के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा, अब किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। राहुल गांधी ही इस लड़ाई का चेहरा हैं जो संविधान, लोकतंत्र और सेक्युलरिज़्म को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। AAP ने कभी भाजपा से नहीं, बल्कि कांग्रेस से ही लड़ाई की और विपक्ष को कमजोर किया।”

राजनीतिक विश्लेषक की राय

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर तनवीर ऐजाज़ का कहना है कि AAP का गठबंधन से बाहर होना इस बात को दर्शाता है कि विपक्षी पार्टियों के बीच भीतरी खींचतान और अलग-अलग महत्वाकांक्षाएं हैं।
उन्होंने कहा, “AAP की यह रणनीति है कि वह उन राज्यों में अपनी पहचान और पोजिशन मजबूत बनाए जहां वो खुद को मुख्य पार्टी मानती है। इसके लिए उसे किसी गठबंधन की जरूरत नहीं महसूस हो रही।”

पहले साथ, फिर अलग

बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में AAP और कांग्रेस ने मिलकर दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, गोवा और चंडीगढ़ में चुनाव लड़ा था, लेकिन फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं और एक-दूसरे पर जमकर हमला भी किया।

AAP के इस फैसले से विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर AAP अपनी अलग पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि इससे गठबंधन और मजबूत होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP की यह रणनीति उसे कितना फायदा पहुंचाती है।

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