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कांग्रेसी भाग रहे चौधराहट की दौड़ में, भाजपाई कर रहे पार्टी को मजबूत

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कांग्रेसी भाग रहे चौधराहट की दौड़ में, भाजपाई कर रहे पार्टी को मजबूत

चंडीगढ़ : प्रदेश में 1 वर्ष के भीतर ही तीन चुनाव होने हैं। लोकसभा विधानसभा और शहरी निकाय चुनाव। जिसे लेकर सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रयासों में लगे हुए हैं। राजनीतिक समीकरणों में उतार-चढ़ाव भी लगातार देखा जा रहा है। इसी कड़ी में लगभग तीन माह पहले जो समीकरण पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में खड़े नजर आ रहे थे, वह फिर से भाजपा को जीत दिलवाने पर मोहर लगा रहे हैं। प्रदेश में जहां लगातार भाजपा संगठन तथा सरकार सक्रिय हो चुकी है, वहीं पिछले लंबे समय से सक्रिय कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों पर रुकावट सी नजर आ रही है। ऐसा लगने लगा है कि खुद कांग्रेस पार्टी के नेता ही नहीं चाहते कि कांग्रेस सत्ता में लौटे। क्योंकि आपसी फूट में इन सभी नेताओं को डर है कि कहीं उनसे बड़ा चौधरी (नेता) किसी दूसरे को ना घोषित कर दिया जाए। इसलिए सभी इस इंतजार में दिख रहे हैं कि पार्टी प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में किसे अपना चेहरा घोषणा करेगी। अगर किसी अन्य की घोषणा हुई तो फिर ऐसी भी संभावनाएं हैं कि इन नेताओं का रुख पार्टी हित की बजाय पार्टी के विरोध में भी नजर आ सकता है।

हर वार्ड, गली, मोहल्ले में मौजूद हुड्डा के समर्थक

दरअसल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की 10 साल तक मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। जिस कारण से पूरे प्रदेश में कोई ऐसा वार्ड, मोहल्ला, गली नहीं जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक नहीं हैं। प्रदेश के अधिकतर कांग्रेसी नेता भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पाले में खड़े नजर आते हैं। अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की पकड़ अपने हलके या जिले में बेशक मजबूत हो सकती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी में आज कोई भी ऐसा नेता मौजूद नहीं जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बराबर वजूद रखता हो। 2004 के विधानसभा चुनाव में हालांकि प्रदेश की जनता ने भजनलाल के चेहरे को देखते हुए कांग्रेस को दिल खोलकर वोट दिए थे। 90 में से 67 सीट कांग्रेस ने जीतकर एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया था। लेकिन पार्टी आलाकमान ने प्रदेश की बागडोर भजनलाल की बजाए चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सौंप डाली। हालांकि प्रदेश की जनता कांग्रेस के इस फैसले से काफी हताश-निराश और नाराज भी दिखी। 

कांग्रेस के लिए हुड्डा को साइड लाइन करना महंगा साबित हो सकता है

एक कुशल राजनीतिज्ञ एवं सटीक कूटनीति के चलते भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने काफी कम समय में प्रदेश के लगभग सभी नेताओं को एक माला में पिरोने का काम किया। विपक्ष में काफी मजबूत स्थिति वाली इनेलो पार्टी के अधिकतर ताकतवर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी में भी खूब आए। हुड्डा ने पार्टी के लिए खूब मेहनत भी की। जिसके फलस्वरुप 2009 में भी कांग्रेस ने हुड्डा के नेतृत्व में चुनाव जीतकर सरकार बनाई। पिछले 9 सालों से सत्ता से कांग्रेस पार्टी दूर है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा फिलहाल पिछले लगभग 4 सालों से नेता प्रतिपक्ष हैं। इस दौरान हुडा टीम ने खूब मेहनत की। जिसका फल भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मिला भी। उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को राज्यसभा में भेजा गया और उनकी इच्छानुसार चौ. उदयभान को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के पद से नवाजा गया। लेकिन कुछ समय से हुड्डा को साइडलाइन करने की नीति कांग्रेस को लगातार कमजोर कर रही है। हालांकि हुड्डा के विरोध में पार्टी के नेता कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी काफी मजबूत हुए हैं। जिसका सीधा असर पार्टी पर पढ़ने लगा है। 3 महीने पहले जो कांग्रेस प्रदेश की जनता की जुबान, दिल और दिमाग पर राज कर रही थी, आज वही जगह फिर से भारतीय जनता पार्टी की बनती नजर आ रही है।

नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए साबित हो सकते हैं तुरुप के इक्के

भाजपा द्वारा हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नायब सिंह सैनी को चुनना भी पार्टी के लिए काफी लाभकारी नजर आने लगा है। ऐसा लगने लगा है कि पार्टी ने सही समय पर तूरूप का इक्का निकाल कर सबको चित करने का काम किया हो। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश संगठन की कमान ओमप्रकाश धनखड़ को दे रखी थी। हालांकि धनखड़ पार्टी के प्रति पूर्णतः समर्पित सिपेसलार हैं। लंबे अनुभव वाले धनखड़ के समय में भारतीय जनता पार्टी ने कई कामयाब कार्यक्रमों का आयोजन किए। बावजूद इसके जाट चेहरा होने की वजह से भाजपा को बहुत कम पसंद करने वाले जाट वर्ग को वह पार्टी से बहुत अधिक जोड़ने में नाकामयाब साबित हुए हैं। जाट होने की वजह से गैर जाट भी उनसे अधिक नहीं जुड़ पाए। यह चुनावी वर्ष है और छोटी सी पार्टी की चूक एक बड़े नुकसान का कारण बन सकती थी। 

जीटी बेल्ट को तवज्जो देकर एक मजबूत किलेबंदी की भाजपा ने

भाजपा को दो बार सत्ता में लाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होने वाली जीटी रोड बेल्ट पर लगातार कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और इनेलो की सक्रियता बढ़ रही थी। जीटी बेल्ट लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी की पेट वोटर रही है। इस बेल्ट पर बैकवर्ड और पंजाबी भाषी वोटरों की एक बहुत बड़ी संख्या मौजूद है जो कांग्रेस को जीत दिलवाने में हमेशा कारगर साबित हुई। 2014 के चुनाव में चल रही लहर के चलते मोदी के नाम पर हरियाणा में भाजपा को जीटी रोड बेल्ट ने उम्मीद से अधिक सीटें जितवाई थी। 2019 में भी 40 सीट जीतने वाली भाजपा की लाज जीटी रोड बेल्ट ने ही बचाई। अब इसमें सेंधमारी का डर भाजपा को लगातार शायद सता रहा था। इसी कारण से नायब सिंह सैनी जो जीटी रोड पर मौजूद कुरुक्षेत्र से संबंध रखते हैं, उन्हें संगठन की जिम्मेदारी सौंप दी गयी। जीटी रोड बेल्ट तो उनकी राजनीतिक कर्मभूमि है ही, साथ ही उनके ओबीसी वर्ग के होने के कारण पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग के लोग भी भाजपा के इस फैसले को अपने सम्मान के रूप में देखेंगे। जिसका बहुत बड़ा लाभ भाजपा को होना लगभग तय माना जा रहा है। कुरुक्षेत्र के साथ लगते जिले अंबाला में प्रदेश के गृह, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज एक कद्दावर नेता है। जिन्हें अजय कहा जाए तो गलत नहीं होगा। न केवल अपने विधानसभा क्षेत्र या जिला बल्कि आसपास के कई जिलों या यूं कहें कि पूरे हरियाणा में ही उनका बहुत बड़ा अपना निजी प्रभाव है। वहीं जीटी रोड पर मौजूद करनाल से खुद मुख्यमंत्री चुनाव लड़ते हैं यानि जीटी रोड बेल्ट को अधिक से अधिक तवज्जो देकर एक मजबूत किलेबंदी की तैयारी भाजपा ने की है।

भाजपा ने साबित किया कि वह दलित-पिछड़ों की सबसे हितेषी पार्टी

ओबीसी वर्ग से नायब सिंह सैनी आरएसएस की कार्य शैली में लंबे समय तक सक्रिय रहे और फिर संगठन के भी विभिन्न पदों पर काम करने के बाद उन्हें पार्टी ने पहले विधायक, फिर सांसद और अब प्रदेश संगठन के मुखिया के रूप में सम्मान बख्शा है। कार्य करने का उनके पास लंबा अनुभव है। बेहद मधुरभाषी तथा मजबूत बुद्धिमत्ता के मालिक सैनी का प्रभाव अपने समाज के साथ-साथ ओबीसी व दलित वर्ग में काफी मजबूत है। प्रदेश में कई बार ओबीसी वर्ग को बरगलाने के लिए कई नेताओं द्वारा तमाम तरह की कोशिशें की जाती रही है। मंचों से अपने को ओबीसी वर्ग के सबसे बड़े हितेषी के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा सैनी को मैदान में उतारना एक गेम चेंजर के रूप में दिखने लगा है। ओबीसी वर्ग के कथित हितैषी ऐसे नेताओं के मुंह बंद करने का काम भाजपा के इस फैसले ने किया है। आज नायब सिंह सैनी के प्रदेश में चल रहे दौरों में छोटी-छोटी जनसभाओं-कार्यक्रमों में भारी भीड़ का जमावड़ा तथा उनके स्वागत रूपी भावों को देखकर यह साफ नजर आने लगा है कि भाजपा को इस फैसले का एक बहुत बड़ा लाभ हो सकता है। 2014 से पहले जो ओबीसी-बीसी तथा पंजाबी वर्ग पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में खड़ा नजर आता रहा है, जिनके दम पर कांग्रेस सदा राज करती रही है, आज लगभग इस पूरे वर्ग को भाजपा ने अपने पक्ष में खड़ा कर लिया है। नायब सिंह सैनी को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने का लाभ भाजपा को पूरे प्रदेश में होना लगभग तय है।

तुलनात्मक अध्ययन करने वाली जनता आज भाजपा के प्रति रखती है झुकाव

वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लगातार सरकारी तिजोरी खोलकर हर वर्ग को रिझाने की कोशिश शुरू कर दी है। चाहे सरकारी कर्मचारियों की बात करें या फिर व्यापारियों, मजदूरों की, हर व्यक्ति के लिए दिल खोलकर पैसा प्रदेश के मुख्यमंत्री लुटा रहे हैं। कुछ समय पहले राशन कार्ड बंद होने से नाराज जनता को सरकार द्वारा जहां बड़ी संख्या में नए राशन कार्ड बनाकर राहत प्रदान की गई, वहीं हर इन राशन कार्डों पर सरसों के तेल इत्यादि मिलने से प्रदेश की गरीब जनता सरकार की वाहवाही करती नजर आ रही है। लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री जन संवाद कार्यक्रम के तहत लोगों की जहां समस्याएं स्वयं दूर कर रहे हैं, वहीं उनके विधायक, सांसद भी मैदान में पूरी सक्रियता से उतरे हुए हैं। प्रदेश की जनता जो कुछ समय पहले तुलनात्मक अध्ययन करके वोट देने की बात कह रही थी या फिर यूं कहें कि जिसका मन 50-50 फ़ीसदी कांग्रेस और भाजपा से जुड़ा हुआ था, वह अब भाजपा के प्रति कुछ अधिक झुकाव वाला नजर आने लगा है।

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Chandigarh News : आखिर अमरुद घोटाला है क्या ? पंजाब के 22 ठिकानों पर ED की कार्रवाई

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Chandigarh News : आखिर अमरुद घोटाला है क्या ? पंजाब के 22 ठिकानों पर ED की कार्रवाई
Enforcement directorate

Ghuva Scam : अमरुद बाग घोटाले को लेकर सूचना निदेशालय (ईडी) एक्शन मोड में है। पंजाब सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन में अमरूद के बाग दिखाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने जांच तेज कर दी है. टीम ने बुधवार को चंडीगढ़, मोहाली और फिरोजपुर समेत 22 जगहों पर छापेमारी की.

इस बीच टीम पंजाब के आईएएस वरुण रुजम के घर भी पहुंची. टीम को मौजूदा एक्साइज कमिश्नर वरुण रूजम के घर के पीछे एक पार्क में कुछ फटे हुए दस्तावेज मिले. इन दस्तावेज़ों में अमरूद के बागानों का उल्लेख है। ईडी को शक है कि खुद को बचाने के लिए दस्तावेजों को फाड़कर फेंक दिया गया.

इसके साथ ही वरुण की पत्नी पर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये का मुआवजा लेने का भी आरोप है. इसके अलावा फिरोजपुर के डीसी राजेश धीमान की पत्नी भी इस मामले में आरोपी हैं. इसके साथ ही ईडी कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों के घरों तक पहुंची है. ईडी लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही थी। इसके मुताबिक गमाडा से सारा रिकार्ड कब्जे में ले लिया गया है।

पता चला है कि इन टीमों में ईडी जालंधर के अधिकारी भी शामिल हैं. ये टीमें स्थानीय पुलिस को भी साथ लेकर आई हैं। इसके साथ ही इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है. इस बीच जो लोग घरों में मिले उन्हें अंदर ले जाया गया। किसी को फोन आदि करने की इजाजत नहीं थी।

आपको बता दें कि मामला ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा एयरपोर्ट रोड पर एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है. गमाडा द्वारा अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत दिया गया था। उस जमीन में लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत जमीन से अलग दी जाती थी।

उद्यान विभाग द्वारा फलदार वृक्षों की कीमत तय की गई। इसके बाद, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने बागवानी निदेशक को फलों के पेड़ों की एक सर्वेक्षण सूची भेजी और पेड़ों की एक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की।

जमीन अधिग्रहण से पहले कुछ लोगों ने यहां अमरूद के पौधे लगाए थे, लेकिन गमाडा अधिकारियों के मुताबिक उनकी उम्र 4 से 5 साल बताई जा रही है। इससे उनका मुआवज़ा काफी बढ़ गया. इस तरह एक साथ कई लोगों को गलत तरीके से मुआवजा मिल गया. इस मामले में विजिलेंस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन मुआवजा राशि वापस जमा कराने पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

इस मामले में आरोपियों ने मुआवजा पाने के लिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन पर मानक से अधिक अमरूद के पेड़ लगा दिए थे। आरोप है कि जमीन के पट्टाधारकों ने प्रति एकड़ 2000 से 2500 पेड़ दिखाए। यह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की प्रति एकड़ 132 पेड़ों की सिफारिश से कहीं अधिक था।

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Chandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?

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ये चंडीगढ़ के शीर्ष 10 रेस्तरां हैं। ये रेस्तरां चंडीगढ़ में विविध पाक दृश्य को दर्शाते हैं, जो बढ़िया भोजन से लेकर अनौपचारिक भोजनालयों तक भोजन के अनुभवों की एक श्रृंखला प्रदान करते हैं, और दुनिया भर के विभिन्न व्यंजनों को प्रदर्शित करते हैं।

Virgin Courtyard : वर्जिन कोर्टयार्ड एक बढ़िया भोजनालय है जो अपने रोमांटिक माहौल और इतालवी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। यह बाहर बैठने के साथ एक आकर्षक वातावरण प्रदान करता है, जो रोमांटिक रात्रिभोज या विशेष अवसरों के लिए एकदम सही है। मेन्यू में विभिन्न प्रकार के प्रामाणिक इतालवी व्यंजन जैसे पास्ता, रिसोटो, लकड़ी से बने पिज्जा और स्वादिष्ट मिठाई शामिल हैं। रेस्तरां भोजन के पूरक के रूप में बढ़िया वाइन का चयन भी प्रदान करता है। Location: SCO 1A, Madhya Marg, Sector 7C, Chandigarh.


Swagath Restaurant & Bar: स्वागत रेस्तरां और बार अपने प्रामाणिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। रेस्तरां ताजा सामग्री और सुगंधित मसालों के साथ तैयार किए गए पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों का एक विविध मेनू प्रदान करता है। डोसा और इडली से लेकर स्वादिष्ट करी और बिरयानी तक, स्वागत व्यंजनों की एक रमणीय श्रृंखला परोसता है जो दक्षिण भारतीय स्वादों के सार को पकड़ता है। रेस्तरां का आकर्षक माहौल और चौकस सेवा भोजन के अनुभव को बढ़ाती है। Location: SCO 7, Sector 26, Chandigarh.


Pal Dhaba: पाल ढाबा एक लोकप्रिय भोजनालय है जो अपने उत्तर भारतीय और पंजाबी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इसमें एक देहाती माहौल है जो पारंपरिक पंजाबी ढाबों के आकर्षण को दर्शाता है। पाल ढाबा अपने मुँह में पानी लाने वाले तंदूरी व्यंजनों, रसीले कबाब, समृद्ध करी और ताज़ी पकाई हुई रोटी के लिए प्रसिद्ध है। रेस्तरां के हार्दिक और स्वादिष्ट भोजन, इसके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के साथ, इसे स्थानीय लोगों और आगंतुकों के बीच समान रूप से पसंदीदा बना दिया है। Location: SCO 151 & 152, Sector 28 D, Sector 28, Chandigarh.

Nandoo’s: नंदो एक प्रसिद्ध श्रृंखला रेस्तरां है जो लौ-ग्रिल्ड पेरी-पेरी चिकन में विशेषज्ञता रखता है। दक्षिण अफ्रीका से उत्पन्न, नंदो अपने विशिष्ट पेरी-पेरी मैरिनेड के साथ एक अनूठा भोजन अनुभव प्रदान करता है, जो चिकन को मसालेदार और तीखे स्वादों से भर देता है। अपने प्रसिद्ध चिकन व्यंजनों के अलावा, नंदो के मेनू में विभिन्न प्रकार के साइड, सलाद और मिठाई शामिल हैं, जो सभी उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और मोटे मसालों के साथ तैयार किए जाते हैं। Location: Elante Mall, 178-178A, Purv Marg, Industrial Area Phase I, Chandigarh.


Whistling Duck: व्हिसलिंग डक एक ट्रेंडी रेस्तरां है जो वैश्विक व्यंजनों की विशेषता वाले अपने विविध मेनू के लिए जाना जाता है। रेस्तरां आधुनिक सजावट और आरामदायक बैठने के साथ एक जीवंत वातावरण प्रदान करता है। मेन्यू में दुनिया भर के स्वादों का मिश्रण शामिल है, जिसमें एशियाई स्टिर-फ्राइज़ और भूमध्यसागरीय सलाद से लेकर अमेरिकी बर्गर और मैक्सिकन टैको तक के विकल्प शामिल हैं। व्हिसलिंग डक में एक अच्छी तरह से भंडारित बार भी है जो कॉकटेल, वाइन और स्पिरिट के चयन परोसता है। Location: SCO 10, Back Lane, Sector 26, Chandigarh.


Brooklyn Central: ब्रुकलिन सेंट्रल एक लोकप्रिय रेस्तरां है जो अपने अमेरिकी शैली के भोजन और जीवंत वातावरण के लिए जाना जाता है। ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क के अनौपचारिक भोजन दृश्य से प्रेरित, रेस्तरां बर्गर, सैंडविच, रिब्स और स्टीक्स जैसे क्लासिक अमेरिकी व्यंजनों की विशेषता वाला एक मेनू प्रदान करता है। अपने जीवंत वातावरण, औद्योगिक-चिक सजावट और मैत्रीपूर्ण सेवा के साथ, ब्रुकलिन सेंट्रल भोजन करने वालों के लिए एक आधुनिक मोड़ के साथ आरामदायक भोजन का आनंद लेने के लिए एक स्वागत योग्य स्थान प्रदान करता है। Location: SCO 20, Madhya Marg, Sector 26, Chandigarh.


Café JC’s: कैफे जेसी एक आरामदायक कैफे है जो अपने आरामदायक माहौल और महाद्वीपीय और इतालवी व्यंजनों के विविध मेनू के लिए जाना जाता है। कैफे इनडोर और आउटडोर बैठने के विकल्पों के साथ एक आकर्षक सेटिंग प्रदान करता है। मेन्यू में नाश्ते के सामान, सैंडविच, सलाद, पास्ता और लकड़ी से बने पिज्जा शामिल हैं, जो सभी ताजा और स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्री का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं। कैफे जेसी कॉफी, चाय, स्मूदी और मॉकटेल सहित पेय पदार्थों का चयन भी प्रदान करता है। Location: SCO 437 & 438, Sector 35C, Chandigarh.


The Willow Cafe: द विलो कैफे एक अनोखा भोजनालय है जो अपने शांत वातावरण और शाकाहारी-अनुकूल भोजन के लिए जाना जाता है। कैफे एक आरामदायक और स्वागत योग्य वातावरण प्रदान करता है, जिसमें अंदर और बाहर हरियाली से घिरा हुआ है। मेन्यू में सलाद, सैंडविच, रैप्स, सूप और भारतीय विशेषताओं सहित विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और शाकाहारी विकल्प शामिल हैं। विलो कैफे जैविक और टिकाऊ सामग्री का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भोजन करने वालों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। Location: Shop 1, Inner Market, Sector 10 D, Chandigarh.

Gustoso: गुस्टोसो एक प्रामाणिक इतालवी रेस्तरां है जो अपने लकड़ी से बने पिज्जा और क्लासिक इतालवी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। रेस्तरां गर्म रोशनी और सुरुचिपूर्ण सजावट के साथ एक स्टाइलिश और समकालीन सेटिंग प्रदान करता है। मेन्यू में एंटीपास्टी, पास्ता, रिसोटस और मुख्य व्यंजनों की एक श्रृंखला है, जो सभी प्रामाणिक इतालवी स्वादों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के साथ तैयार किए जाते हैं। गुस्टोसो के पास भोजन के अनुभव के पूरक के रूप में इतालवी वाइन प्रदर्शित करने वाली वाइन की एक विस्तृत सूची भी है। Location: SCO 16 & 17, Madhya Marg, Sector 7C, Chandigarh.


Hops n Grains: हॉप्स एन ग्रेन्स एक सूक्ष्म शराब बनाने की दुकान और रेस्तरां है जो अपने शिल्प बियर और स्वादिष्ट भोजन प्रसाद के लिए जाना जाता है। शराब बनाने की दुकान पारंपरिक शराब बनाने की तकनीकों और प्रीमियम सामग्री का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित बीयर का उत्पादन करती है, जिसमें लेजर्स, एल्स और स्टाउट्स शामिल हैं। अपने बीयर के अलावा, हॉप्स एन ग्रेन्स ऐपेटाइज़र, बर्गर, पिज्जा, कबाब और भारतीय विशिष्टताओं का एक विविध मेनू प्रदान करता है, जो सभी अपने पेय के साथ पूरी तरह से जोड़ी बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। जीवंत वातावरण, जीवंत संगीत और मैत्रीपूर्ण सेवा हॉप्स एन ग्रेन्स को बीयर के शौकीनों और भोजन प्रेमियों के लिए समान रूप से एक लोकप्रिय गंतव्य बनाती है। Location: SCO 358, Sector 9, Panchkula, Chandigarh.

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Chandigarh में डीजल बसों की जगह चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

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Chandigarh में डीजल बसों की जगह चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

यूटी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ट्राइसिटी रूटों पर 100 डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का फैसला किया है। राज्य स्तरीय संचालन समिति की पहली बैठक में अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने केंद्र प्रायोजित “प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना” के तहत चंडीगढ़ को 100 बसें आवंटित की हैं। इसके बाद समिति ने 100 डीजल बसों के प्रतिस्थापन की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।

योजना के तहत, केंद्र 12 मीटर की बस के लिए 10 वर्षों तक प्रति वर्ष 5% की दर से बढ़ोतरी के साथ ₹24/किमी का भुगतान करेगा। सहायता प्रदान की जाएगी. इसके अलावा यूटी को मीटर के पीछे बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए 100% केंद्रीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। यूटी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा मीटर के पीछे बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए 11.87 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया है, जिसे मंत्रालय को भेजा गया था, जिसने इसे मंजूरी दे दी है और यह राशि राज्य की नोडल एजेंसी के खाते में जमा कर दी जाएगी।

समिति को बताया गया कि सीईपीटी विश्वविद्यालय ने 2022 से 2031 के लिए खरीद रणनीति के साथ शहर के लिए एक संशोधित बस और सेवा योजना प्रस्तुत की है। समिति को सूचित किया गया कि सी.ई.पी.टी. प्रतिबंध के खिलाफ बस प्रतिस्थापन और सिटी बस सेवाओं के लिए बेड़े को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा एक चरणबद्ध खरीद योजना बनाई गई थी। समिति ट्राइसिटी मार्गों पर 70 बसें जोड़कर सिटी बसों के परिचालन बेड़े को मजबूत करने पर सहमत हुई है।

इस योजना का उद्देश्य उन लोगों के बीच सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है जो निजी वाहन पसंद करते हैं। अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय से पीएम ई-बस सेवा के तहत 70 और बसें आवंटित करने का अनुरोध किया जाएगा। समिति ने यूटी के मुख्य अभियंता को बुनियादी ढांचे के लिए जल्द ही ई-टेंडर बुलाने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बसों की डिलीवरी से पहले चार्जिंग तैयार हो जाएगी।

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