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मौत को चकमा देकर जिंदा वापस आया बुजुर्ग व्यक्ति, लाइव कैमरे में कैद हुई तस्वीर

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आज के समय में सोशल मीडिया पे कौनसी चीज किसी से छुपी है | आये दिन कोई ना कोई घटना देखने और सुनने को मिल ही जाती है | कभी भी कोई भी वीडियो वायरल हो कर हम तक पहुंच ही जाती है | एक समय था जब हम केवल कहानियों में सुनते थे कि एक व्यक्ति मरने के बाद अंतिम संस्कार में वापस जीवित हो गया |
अब ऐसी ही एक घटना लाइव कैमरे में कैद हो गई, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है. एक बुजुर्ग व्यक्ति मौत को चकमा देकर वापस जिंदा हो गया। परिजन उसे श्मशान घाट ले गए लेकिन वहां वह बच गया।

यह वीडियो कहां का है और कब बनाया गया, इसके बारे में सोशल मीडिया पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। जिसने भी ये वीडियो देखा वो हैरान रह गया. वीडियो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग की मौत के बाद पूरा परिवार और रिश्तेदार एक साथ आए हैं. सभी लोग अंतिम संस्कार कर रहे थे। इसी बीच बुजुर्ग ने कुछ हरकत की.

https://www.instagram.com/reel/C1KX7KIMozv/?utm_source=ig_web_copy_link

वहां मौजूद कुछ लोग अंतिम संस्कार को कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे थे. जिसके चलते उनके शरीर में हरकत होते ही यह घटना कैमरे में कैद हो गई. यह देखकर वे बुजुर्ग को उसके सफेद कपड़ों से बाहर खींचने लगे। इसी बीच कुछ लोगों को यह कहते हुए सुना गया, ‘जल्दी करो, वह जिंदा है।’ वायरल वीडियो पर अब बड़ी संख्या में लोग कमेंट भी कर रहे हैं. इस वीडियो को giedde नाम के इंस्टाग्राम पेज ने शेयर किया है.

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Dr. Naima Khatoon बनी AMU की पहली महिला Vice Chancellor

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के vice chancellor के रूप में Dr. Naima Khatoon की नियुक्ति भारतीय शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस नियुक्ति के साथ Dr. Naima Khatoon विश्वविद्यालय के इतिहास में इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाली पहली महिला बन गई हैं। यह उपलब्धि Dr. Naima Khatoon की शैक्षणिक उपलब्धियों और नेतृत्व गुणों का एक प्रमाण और शैक्षणिक नेतृत्व में लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम का भी प्रतिनिधित्व करता है।

पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्र में शीर्ष नेतृत्व की स्थिति में एक महिला के रूप में, Dr. Naima Khatoon की नियुक्ति उन युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अकादमिक करियर बनाने की इच्छा रखती हैं। यह पूरे शिक्षा समुदाय के लिए गर्व की बात है और उम्मीद है कि यह नियुक्ति अधिक महिलाओं को शिक्षा क्षेत्र में ऐसे पदों पर आने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

Dr एक अनुभवी प्रोफेसर और विद्वान के रूप में, खातून शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक न्याय में बहुमूल्य योगदान देंगी। उनकी अथक मेहनत, दृढ़ संकल्प और दूसरों, विशेषकर महिलाओं और अन्य वर्गों का नेतृत्व करने की इच्छाशक्ति के कारण उनका इस पद पर पहुंचना डॉ. नईमा खातून के जीवन के अच्छे पहलुओं को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में जन्मी और पली-बढ़ी नईमा खातून की शुरुआती रुचि शिक्षा और समाज सेवा में रही। सामाजिक दबावों और सीमित संसाधनों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने अटूट समर्पण के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। अपने पूरे करियर के दौरान डॉ. ख़ातून महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता की आवाज़ बन गईं। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और सभी के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय मान्यता और कई पुरस्कार प्राप्त करने के उद्देश्य से विभिन्न परियोजनाओं पर काम किया है।

AMU के कुलपति के रूप में डाॅ. ख़ातून की नियुक्ति विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1875 में स्थापित, विश्वविद्यालय में पुरुष शिक्षाविदों द्वारा नेतृत्व की एक लंबी परंपरा रही है, और डॉ. खातून का चुनाव अधिक समावेशी और विविध नेतृत्व संरचना की ओर बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी नियुक्ति की विश्वविद्यालय और देश भर में व्यापक रूप से सराहना और स्वागत किया गया है, क्योंकि इसे प्रगति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और अकादमिक और उससे परे नेतृत्व की भूमिका निभाने की इच्छुक युवा महिलाओं के लिए इसे प्रेरणा के स्रोत के रूप में देखा जाता है।

डॉ। खातून ने विश्वविद्यालय के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार की है, जिसमें एक समावेशी परिसर वातावरण को बढ़ावा देना, अंतःविषय अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करना शामिल है। एएमयू अपनी समृद्ध विरासत को अधिक आधुनिक, न्यायसंगत और नवीन भविष्य की ओर ले जाने की योजना बना रहा है। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित एक अधिक विविध और समावेशी संस्थान का मार्ग प्रशस्त होगा। अपने उद्घाटन भाषण में Dr. Naima Khatoon ने सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। “शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी है,” उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि एएमयू न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर ज्ञान, समावेश और सामाजिक न्याय का प्रतीक बना रहे।”

डॉ। नईमा खातून जैसी शख्सियतों और अल्पसंख्यक समुदायों की ऐसी अन्य उपलब्धियों के बारे में कहानियां व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं को एक बेहतर दुनिया बनाने की दिशा में कदम उठाने के लिए आवश्यक प्रेरणा और प्रोत्साहन दे सकती हैं। इसके अतिरिक्त, ये आख्यान महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, शैक्षणिक पाठ्यक्रम और अन्य शैक्षिक सामग्रियों में ऐसी कहानियों को शामिल करने से अल्पसंख्यक समुदाय के भविष्य के नेताओं को आकार देने में मदद मिल सकती है।

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सभी देशों से Bharat श्रेष्ठ देश है जहां लोगो के बीच प्रेम, प्यार और एकता देखने को मिलती है !

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सभी देशों से Bharat श्रेष्ठ देश है, जहां अलग अलग भाषा व संस्कृति के बावजूद हम एक सूत्र में बंधे हैं। राष्ट्र की एकता व अखंडता को बनाये रखने के लिए हम सभी तत्पर हैं। एकता व अखंडता के बगैर किसी देश का विकास संभव नहीं है। एकता ही महान शक्ति है और इसी से अखंड Bharat का निर्माण संभव है। देश के सभी घटकों को भिन्न-भिन्न विचार, आस्था के होते हुए भी आपसी प्रेम, एकता, भाईचारा बना रहे।

धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्ष से विभाजित दुनिया में, Bharat शांतिपूर्ण अस्तित्व का एक चमकदार उदाहरण है। नफरत फैलाने वालों की समय-समय पर कोशिशों के बावजूद देश का भाईचारा सभी बाधाओं को पार कर विविधता में एकता की खूबसूरती को उजागर कर रहा है। भारत के कुछ हिस्सों में हाल की घटनाएं भारत के समावेशन और दरिया दिली की एक खुशहाल तस्वीर पेश करती हैं।

दक्षिणी तमिलनाडु में विनाशकारी बाढ़ के बाद, सेंदुगनालूर बेथुलामल जमात मस्जिद ने जरूरतमंद हिंदू परिवारों को आश्रय देने के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। इन हिंदू परिवारों ने करीब चार दिनों तक इस मस्जिद में शरण ली| इसके साथ ही उन्हें खाना, कपड़े और दवाइयां भी दी गईं| यह निस्वार्थ सेवा धार्मिक सीमाओं के पार एकता की भावना को दर्शाती है। जो कि कठिन समय में विभिन्न समुदायों को एक-दूसरे को एक साथ जोड़ता है।

इसी तरह, कर्नाटक के कोपल में, आतिथ्य की एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई, जब एक मुस्लिम परिवार ने सबरीमाला मंदिर के तीर्थयात्रियों का अपने घर में स्वागत किया। खाशिम अली मुदाबली (पिंजारा समुदाय के जिला अध्यक्ष) के नेतृत्व में मुमलिम परिवार ने दावत का आयोजन किया। जहां हिंदू तीर्थयात्रियों को न केवल खाना खिलाया गया, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों को एकजुट करने वाले धार्मिक समारोह में भी शामिल किया।

कर्नाटक के बीदर में, विभिन्न धर्मों के छात्र रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान उपवास खोलने के लिए एक साथ आए । गैर-मुस्लिम छात्रों ने रोज़ा खोलते समय अपने मुस्लिम साथियों की सेवा की। धार्मिक और सांस्कृतिक विभाजनों से दूर, आपसी भाईचारे का संदेश पूरे क्षेत्र में गूंजा।

ऐसे उदाहरण धर्मनिरपेक्षता के प्रति Bharat की प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में काम करते हैं। देश में एकता की ये कहानियाँ एकता के उस भाव की पुष्टि करती हैं, जो भारतीय पहचान को परिभाषित करता है। हमें इन कहानियों से प्रेरणा लेकर उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है, जो हमें बांटने का काम करती हैं। हमारी सामूहिक शक्ति और लचीलेपन में ही भारत की असली सुंदरता है, जो नफरत के अंधेरे में चमकता हुआ सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।

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गरीबी के कारण 3 लड़कियों घर से भागी, लेकिन…….

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यूपी के देवरिया में उस वक्त हड़कम मच गया जब तीन नाबालिग लड़कियां अपना घर छोड़कर फरार हो गई | तीनों लड़कियां गरीब घर से है और तीनो सहेलियां है | तीनो लकड़ी 10 फरवरी को घर से निकल गई थी| लेकिन गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर शातिरों के चुंगल में फस गयी और उन तीनो को बहला फुसलाकर बिहार ले गए थे | बिहार में उन्होंने तीनों लड़कियों को एक आर्केस्ट्रा ग्रुप में भर्ती करवा दिया. जिसमें उनसे नाच-गाना करवाया जाने लगा.  
इस खबर के बाद देवरिया में सन सनी फैल गई| पुलिस के लिए उन लड़कियों को ढूंढ पाना मुश्किल होता जा रहा था | पुलिस जाँच पर लगी हुई थी | आपको बतादें की सर्विलांस के जरिये तीनों लड़कियों की लोकेशन को ट्रेस किया तो पता चला की वो तीनो बिहार के मोतिहारी ने है |
उसके बाद पुलिस अलर्ट हो गई और फ़ौरन एक टीम भेजी और साथ ही में मोतिहारी पुलिस में संपर्क किया | उन तीनो लड़कियों को सही सलामत बरामद कर लिया गया |

उनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बिहार के रहने वाले आर्केस्ट्रा संचालक, तीन महिलाओं समेत 5 को गिरफ्तार कर लिया. बाद में उन्हें कोर्ट में पेश में किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया |
पूरा मामला थाना खुखुंदू क्षेत्र के एक गांव का है, जहां की रहने वाली तीन सहेलियां 10 फरवरी को बिना बताए घर से गायब हुई थीं. उन सभी की उम्र 16 वर्ष से कम है और परिवार काफी गरीब है. हालांकि, तीनों ही फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी एक्टिव रहती थीं. जहां उन्हें ग्लैमर की दुनिया की चमक-धमक भा गई. 
बताया जा रहा है कि लड़कियां ग्लैमर की दुनिया से प्रभावित थीं और उसी में काम पाने की तलाश में घर से भागी थीं. लेकिन गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर उनकी मुलाकात कुछ महिलाओं व पुरुषों से हुई, जिनके चंगुल में फंसकर वह बिहार के मोतिहारी जा पहुचीं. वहां उनसे आर्केस्ट्रा में काम कराया जाने लगा. 

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