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Punjab न कभी झुका और न कभी झुकेगा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट संदेश दिया

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज आम आदमी पार्टी के नेताओं पर इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) द्वारा बार-बार छापेमारी के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए डराने-धमकाने और बदले की राजनीति के हथकंडों के आगे पंजाब कभी नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ईडी की रेड के दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगा। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि ऐसी छापेमारी सिर्फ उन राज्यों में क्यों की जा रही है जहां भाजपा सत्ता में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मोदी सरकार का असली इरादा काला धन की वसूली नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं पर दबाव डालकर उन्हें भाजपा में शामिल करवाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे नेता बाद में भाजपा में शामिल हो गए और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुओं और शहीदों की धरती वाला राज्य पंजाब, औरंगजेब के जुल्मों के आगे भी नहीं झुका। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे भी नहीं झुकेगा और यह भी कहा कि भाजपा-ईडी गठजोड़ का पतन पंजाब से ही शुरू होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), इनकम टैक्स विभाग और यहां तक कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रही हैं, बल्कि गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निशाना बनाया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने इन संस्थाओं को नेताओं, कारोबारियों और जनप्रतिनिधियों को धमकाने के लिए राजनीतिक दमन के साधनों में बदल दिया है। उन्होंने कहा, “अपनी ड्यूटी निष्पक्षता से निभाने की बजाय इन संस्थाओं का इस्तेमाल अब राजनीतिक हिसाब-किताब तय करने और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने पूरे देश में यही तरीका अपनाया है जहां छापेमारी भ्रष्टाचार उजागर करने या काला धन वापस लाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जाती है। उन्होंने कहा, “भाजपा का संदेश साफ है- या तो भाजपा में शामिल हो जाओ या छापेमारी और जांच के जरिए परेशानी का सामना करो।”

राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के हालिया मामले का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनके आवास, यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक संस्थानों पर दो दिनों तक छापेमारी की गई। उन्होंने सवाल किया, “जिस पल वे भाजपा में शामिल हुए, छापेमारी बंद हो गई और इसके बजाय उन्हें केंद्र से सुरक्षा प्रदान की गई। क्या यह एजेंसियों की राजनीतिक दुरुपयोग की ज्वलंत मिसाल नहीं है?”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसी चालें पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा, “हम अपनी शुरुआत से ही विरोधी हालातों का सामना कर रहे हैं। पंजाब ने कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा।” कैबिनेट मंत्री और कारोबारी संजीव अरोड़ा के आवास पर ईडी की कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार छापों से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक रूप से प्रेरित छापेमारी सिर्फ डर पैदा करने, दबाव बनाने और राजनीतिक विरोधियों की बाजू मरोड़ने के लिए है, लेकिन पंजाब ऐसी चालों के आगे नहीं झुकेगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों-महापुरुषों और महान शहीदों की पवित्र धरती है। यह धरती औरंगजेब के जाबर के आगे नहीं झुकी और न ही मोदी के आगे झुकेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि ईडी और भाजपा के बीच “अनैतिक गठजोड़” का अंत पंजाब से ही शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने आगे सवाल किया कि ईडी के छापे मुख्य रूप से विपक्षी सरकार वाले राज्यों में ही क्यों किए जाते हैं जबकि भाजपा शासित राज्य इससे बाहर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जब से ‘आप’ सरकार ने बेअदबी विरोधी सख्त कानून पास किया है, भाजपा भड़क गई है और राज्य की नेतृत्व को डराने की अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने कहा, “एक साल में तीसरी बार संजीव अरोड़ा के घर छापेमारी की गई है। पहले भी कुछ नहीं मिला था और अब भी कुछ नहीं मिलेगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबियों ने मोदी सरकार को तीन काले कृषि कानून रद्द करने के लिए मजबूर किया था और अब केंद्र पंजाबियों को तंग-परेशान, बदनाम और निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “इन ईडी छापों का उद्देश्य वसूली नहीं, बल्कि नेताओं को भाजपा में शामिल करने के लिए राजनीतिक दबाव है।” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब के पास जुल्म का विरोध करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की शानदार विरासत है। उन्होंने आगे कहा कि दबाव की राजनीति कहीं और काम कर सकती है, लेकिन पंजाब कभी धमकियों या जबरदस्ती के आगे नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने जालिम ताकतों को हमेशा मुंह तोड़ जवाब दिया है और यहां के लोग जानते हैं कि चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपने अधिकारों और मान-सम्मान की रक्षा कैसे करनी है।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र ने चंडीगढ़, भाखड़ा, नदियों के पानी और पंजाब यूनिवर्सिटी सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर पंजाब के साथ लगातार भेदभाव किया है। उन्होंने कहा, “केंद्र ने पंजाब का आरडीएफ फंड सहित हजारों करोड़ रुपए के फंड रोके हुए हैं ताकि पंजाब के विकास की रफ्तार को प्रभावित किया जा सके।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा में पंजाब के बेमिसाल योगदान के बावजूद राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पंजाब राष्ट्रीय पूल में गेहूं और चावल की बड़ी मात्रा में योगदान देकर देश का पेट भरता है, जबकि पंजाबी युवा बेमिसाल हिम्मत और कुर्बानी के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।”

फूट डालो राजनीति का सख्त विरोध करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब का सामाजिक ताना-बाना साम्प्रदायिक सद्भावना, भाईचारे की साझ और आपसी सम्मान पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब की उपजाऊ मिट्टी में नफरत के अलावा कुछ भी नहीं उग सकता। यहां राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू और सिखों को बांटने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।” बेअदबी विरोधी कानून पर दृढ़ स्टैंड लेते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और सभी धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता व सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किया गया बेअदबी विरोधी कानून केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेअदबी विरोधी कानून को दुनिया भर की संगतों से भारी समर्थन मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ “एक खास परिवार” बेअदबी की पिछली घटनाओं में अपनी संलिप्तता के कारण इस कानून का विरोध कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जो लोग दावा कर रहे हैं कि पंथ ने इस कानून को रद्द कर दिया है, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि लाखों लोग इसका समर्थन क्यों कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ लोग संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं और कानून के आस पास अनावश्यक उलझन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बेअदबी विरोधी कानून पहले ही संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “राज्यपाल ने एक्ट को मंजूरी दे दी है। इस कानून को वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कानून लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद बनाया गया था और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सख्त बेअदबी विरोधी कानून की मांग करते हुए लगभग डेढ़ साल से विरोध प्रदर्शन और धरने जारी थे।

उन्होंने कहा कि आज कानून का विरोध करने वाले कई सिख बुद्धिजीवियों और विद्वानों ने पहले भी बेअदबी की घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून की मांग की थी  उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जुलाई 2007 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने खुद एक प्रस्ताव पास करके सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की रक्षा और सम्मान के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया था। विरोधी पक्ष के बदलते स्टैंड पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पूछा कि जिन लोगों ने पहले विधायी हस्तक्षेप का समर्थन किया था, वे अब यह कैसे दावा कर रहे हैं कि सरकार ऐसा कानून नहीं बना सकती।उन्होंने कहा कि ऐसे नेता ‘बराबर अथॉरिटी’ चलाने की कोशिश कर रहे हैं और संवेदनशील धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं।

*दबाव के तहत बेअदबी विरोधी कानून रद्द नहीं करेगा पंजाब; “शुक्राना यात्रा” को बड़े स्तर पर मिले हुंकारे से ध्यान हटाने की कोशिशें की जा रही हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान*बेअदबी विरोधी कानून के खिलाफ मीटिंगों और विरोध प्रदर्शनों की धमकी देने वाले बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर लोकतांत्रिक समूह को मीटिंग करने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से कहा कि किसी भी दबाव के तहत कानून को रद्द नहीं किया जाएगा।

अपनी चल रही “शुक्राना यात्रा” पर सवालों के जवाब में, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आरोप लगाया कि ईडी के छापे, नोटिस और विवाद जानबूझकर यात्रा के साथ-साथ किए जा रहे हैं ताकि मीडिया का ध्यान पूरे पंजाब में मिल रहे भारी जनसमर्थन से हटाया जा सके।मुख्यमंत्री ने भाजपा की “तानाशाही मानसिकता” की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा जनजीवन के हर क्षेत्र, संस्थाओं से लेकर संस्कृति और सार्वजनिक भाषण तक को नियंत्रित करना चाहती है।

उन्होंने पंजाब को डर या अस्थिरता की ओर धकेलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाबी ऐसी राजनीति का एकजुट होकर जवाब देंगे। ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है। भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग कर रही है।”

“ईडी के छापे सिर्फ उन राज्यों में ही क्यों मारे जा रहे हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है? यह सीधा लोकतंत्र का कत्ल है। पंजाबियों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की राजनीति की जा रही है। हमें डराने और धमकाने के लिए हर रोज नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं: पंजाब गुरुओं और संतों-महापुरुषों की धरती है। इस उपजाऊ मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी जड़ नहीं पकड़ सकता।” एक्स पोस्ट पर उन्होंने कहा, “असल में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून पास होने के बाद भाजपा बुरी तरह बौखलाई हुई है। पंजाब के लोगों के साथ ऐसी खेलें खेलना बंद करो। यह तानाशाही रवैया यहां काम नहीं करेगा। हम पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करते रहेंगे। न तो हम झुकेंगे, न ही रुकेंगे।”

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