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राजस्थान से जुड़े साइबर ठगी के बड़े रैकेट का Haryana पुलिस ने किया भंडाफोड़

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Haryana साइबर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी मामले का खुलासा किया है, जिसमें राजस्थान के कुछ कम पढ़े-लिखे युवकों ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए देशभर के लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। ये आरोपी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को यह संदेश भेजते थे:“अपने मोबाइल से लाखों रुपये कमाना चाहते हैं? तो इस लिंक पर क्लिक करें और हमारे ग्रुप में शामिल हों। अंग्रेजी ना जानने पर भी आपको बड़ी रकम मिलेगी।”

9 करोड़ रुपये की ठगी, 8 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की जांच में पता चला कि इन युवकों ने 1931 लोगों से करीब 9 करोड़ रुपये ठगे। सोनीपत साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों (अजय, पिंटू, सचिन, रावलराम, हरिमोहन, राकेश, यशराज, और देशराज) को जयपुर, सवाई माधोपुर, और जोधपुर से गिरफ्तार किया है।

कैसे शुरू हुई जांच?
यह मामला 11 अक्टूबर 2024 को तब सामने आया, जब गौरव, निवासी जांटी कलां, सोनीपत, ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। गौरव ने बताया कि 30 सितंबर 2024 को उसकी इंस्टाग्राम आईडी पर एक लिंक आया। लिंक पर क्लिक करने पर वह व्हाट्सऐप पर पहुंचा, जहां उसे एक टास्क दिया गया। गौरव ने कहा, “शुरू में उन्होंने मुझे फोटो लाइक करने का टास्क दिया और 123 रुपये मेरे अकाउंट में ट्रांसफर किए। इसके बाद उन्होंने 14 टास्क पूरे करवाए और 140 रुपये और दिए। धीरे-धीरे उन्होंने मेरा विश्वास जीत लिया और मुझसे 1,000 रुपये इन्वेस्ट करवाए, जिसके बदले 1,300 रुपये वापस दिए। इसी तरह उन्होंने मुझे 16,93,976 रुपये की ठगी का शिकार बना लिया।”

पुलिस की कार्रवाई
साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। पुलिस ने: 7.98 लाख रुपये उनके खातों से बरामद किए और 27,000 रुपये नकद, 5 मोबाइल फोन, 1 एटीएम कार्ड, और 1 चेक बुक जब्त की। आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

देशभर में फैला नेटवर्क
पुलिस ने ICCCC (Indian Cyber Crime Coordination Centre) के डेटा की जांच की, जिसमें पाया गया कि आरोपियों के खिलाफ पूरे भारत में 1931 शिकायतें और 64 मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में ठगी के अलग-अलग तरीके अपनाए गए, जैसे: व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर फर्जी लिंक भेजना, पार्ट-टाइम जॉब ऑफर करना, ऑनलाइन ट्रेडिंग और स्टॉक इन्वेस्टमेंट की फर्जी योजनाएं बताना, मोबाइल हैकिंग।

पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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