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अकाली दल और बादल परिवार ने अपनी खत्म हो रही प्रासंगिकता बचाने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब को राजनीतिक अखाड़ा बना लिया है: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने तीखा हमला करते हुए कहा कि राजनीति के इतिहास में यह पहली बार है कि श्री अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज साहिब किसी खास राजनीतिक पार्टी के पक्ष में खड़े होकर खुलेआम राजनीति कर रहे हैं।

सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पूरी दुनिया में सिखों की सर्वोच्च और सबसे पवित्र जगह है, न कि सुखबीर सिंह बादल या अकाली दल की निजी जागीर। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब को सुखबीर बादल के कहने पर आधी रात को जत्थेदार बनाया गया, बिना किसी सिख पंथ या संगठन की राय लिए, ऐसी जगह पर जहां गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश भी नहीं हुआ था।

ऐसे में बादल परिवार के प्रति उनकी वफादारी और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी का खुद को सुखबीर बादल का सिपाही कहना, इन महान सिख संस्थाओं के राजनीतिकरण का जीता-जागता सबूत है।

बलतेज पन्नू ने जत्थेदार द्वारा जारी कथित फोरेंसिक रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कौन है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हम आपकी रिपोर्ट मान भी लें कि वीडियो (एआई) से नहीं बनाई गई, तो जत्थेदार साहिब हमें बताएं कि उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हाइट क्या है? जिस मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आप उंगली उठा रहे हैं, क्या उनकी हाइट वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हाइट से मेल खाती है? वह कौन सा होटल का कमरा है जहां गुरु साहिब की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जैसा कि दावा किया जा रहा है? रिपोर्ट यह बताने में पूरी तरह नाकाम है कि वीडियो में असल में कौन है। पन्नू ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को जनता के सामने दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी।

अकाली दल के इतिहास को काले पन्नों से भरा बताते हुए पन्नू ने कहा कि साल 2015 में बुर्ज जवाहर सिंह वाला से गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र किताब चोरी हुई, सिखों को गाली-गलौज वाले पोस्टर लगाकर चुनौती दी गई और अक्टूबर महीने में गुरु साहिब के अंगों को कूड़े के ढेर में लुढ़का दिया गया।

उस समय पंथक मुखौटा पहनकर बार-बार सरकार बनाते बनाने वाले सुखबीर बादल और उनके लोग, सोते रहे। उन्होंने जस्टिस जोरा सिंह कमीशन की रिपोर्ट को दबाया, गवाहों को पुलिस की नौकरी देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की और जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट को विधानसभा के बाहर एक-दो रुपये में बेच दिया। कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड के सबूत मिटाने की हर मुमकिन कोशिश की गई, जिसकी वजह से आज सुखबीर बादल, सुमेध सैनी और उमरानंगल जैसे लोग बेल पर कोर्ट के बाहर घूम रहे हैं। उन्हें डर है कि बहबल कलां की जांच भी जल्द ही उनके गले की फांस बनने वाली है।

पन्नू ने कहा कि साल 2022 में जब पंजाब के लोगों ने आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत दिया और भगवंत मान की सरकार बनाई, तो इन पुराने नेताओं के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। पहले तो उन्होंने झूठा प्रचार किया कि यह सरकार 3 महीने या एक साल नहीं चलेगी। जब सरकार ने बहुत अच्छा काम करना शुरू किया और मुख्यमंत्री मान हेल्थ चेक-अप के लिए अस्पताल गए, तो उनकी घबराहट इतनी बढ़ गई कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री की बेटी का वीडियो दिखाया और गंदी राजनीति की। लेकिन पंजाब के लोगों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

पन्नू ने पंजाब सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज साढ़े चार साल होने जा रहे हैं और राज्य में सरकार के खिलाफ कोई ‘एंटी-इनकंबेंसी’ नहीं है। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने जालंधर लोकसभा उपचुनाव, गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, तरनतारन उपचुनाव समेत नगर निगम, नगर परिषद और सरपंच चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह जीत लाठी या पुलिस के बल पर नहीं, बल्कि विकास के बल पर 2017 तक चले उनके गुंडा राज को खत्म करके मिली है। मान सरकार ने नहरी पानी की पहुंच 21% से बढ़ाकर 80% की, किसानों को दिन में बिजली दी, लोगों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली दी, सड़कों पर रोड सेफ्टी फोर्स तैनात की और जनता को 10 लाख रुपये के मुफ्त कैशलेस इलाज के साथ हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड दिया।

बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली दल के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस मान सरकार को वे हमेशा बदनाम करते थे, उसी मान सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी रोकने के लिए ‘सत्कार एक्ट’ में ऐतिहासिक बदलाव करके सख्त कानून लागू किया है। अब बेअदबी करने वाले को सजा भुगतनी पड़ेगी।

यह एक्ट भी पास हो गया और गवर्नर के साइन के बाद लागू हो गया। बादल परिवार, जो खुद को पंथ का ठेकेदार मानता था और जिसने 2007 से 2017 के बीच पंजाब की पूरी पीढ़ी को नशे की आग में झोंक दिया, आज गुरु नानक देव जी की धरती पर बने इस सख्त कानून को पचा नहीं पा रहा है। इसी घबराहट में उन्होंने अब अपनी राजनीति का आखिरी कार्ड खेल दिया है, बदकिस्मती से उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को भी मोहरे के तौर पर मैदान में उतार दिया है, लेकिन पंजाब के समझदार लोग उनके इन मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

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