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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत छह महीनों में 2,300 डायबिटीज़ रोगियों का कैशलेस इलाज,₹6.5 करोड़ का उपचार कवर

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डायबिटीज़ शायद ही कभी किसी चिकित्सीय आपात स्थिति के रूप में शुरू होता है। इसकी शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखाई देना, बिना कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। इन शुरुआती संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जब तक कि स्थिति गंभीर होकर अस्पताल में भर्ती होने, गहन चिकित्सा (आईसीयू), सर्जरी या डायलिसिस की आवश्यकता तक न पहुँच जाए।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के नवीनतम स्वास्थ्य आँकड़े बताते हैं कि डायबिटीज़ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। यह तेज़ी से कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे परिवारों, रोज़गार देने वालों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, असंतुलित खान-पान, जंक और प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, तंबाकू और शराब के सेवन के कारण दुनिया भर में डायबिटीज़ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे कार्य घंटे, पर्याप्त नींद का अभाव और लगातार तनाव ने भी इस बीमारी के ज़ोख़िम को और बढ़ा दिया है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही स्वास्थ्य योजना मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, द्वारा 21 जुलाई 2026 तक साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों के 1,123 मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए, इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि डायबिटीज़ तेज़ी से पंजाब की आर्थिक रूप से उत्पादक आबादी को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि इसका प्रभाव कम आयु वर्ग के लोगों पर भी दिखाई दे रहा है।

उपचार संबंधी आँकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अस्पताल पहुँचने वाले कई मरीज़ गंभीर अवस्था में थे। खून में शुगर का स्तर बेहद अनियंत्रित होने से होने वाली जानलेवा स्थिति ‘डायबिटिक कीटोएसिडोसिस’ के इलाज के सबसे अधिक दावे दर्ज किए गए।

लंबे समय तक डायबिटीज़ के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं को होने वाले नुकसान से उत्पन्न डायबिटिक फुट उपचार की दूसरी सबसे प्रमुख स्थिति के रूप में सामने आया। कई मरीज़ों को डायलिसिस, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, सीटी एवं एमआरआई जाँच, गहन चिकित्सा (आईसीयू) तथा डायबिटिक फुट सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जो अस्पताल में भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर अवस्था को दर्शाता है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आँकड़े हर परिवार के लिए एक चेतावनी हैं। उन्होंने कहा, “ये ऐसे लोग नहीं हैं जिन्होंने जीवन की अंतिम अवस्था में प्रवेश कर लिया है। ये राज्य की कार्यशील आबादी है—वे लोग जो परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, व्यवसाय चला रहे हैं, ऋण (लोन) चुका रहे हैं और अपने बुज़ुर्ग माता-पिता का सहारा बने हुए हैं। जब डायबिटीज़ इस आयु वर्ग के लोगों को अस्पताल तक पहुँचा देता है, तो इसका प्रभाव केवल मरीज़ तक सीमित नहीं रहता।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जाँच करवाएँ। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “डायबिटीज़ की जटिलताओं का इलाज करवाने से कहीं आसान है इसकी रोकथाम। जटिलताएँ होने का इंतज़ार न करें। अस्पताल लोगों की जान बचा सकते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण खोए हुए साल वापस नहीं लौटा सकते।”

जहाँ एक ओर पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार का ख़र्च वहन कर मरीज़ों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर जाँच, नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वज़न बनाए रखना तथा तंबाकू और हानिकारक स्तर पर शराब के सेवन से बचना डायबिटीज़ और उससे होने वाली गंभीर एवं अपंगता पैदा करने वाली जटिलताओं के ज़ोख़िम को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।

डायबिटीज़ संबंधी आँकड़े क्या बताते हैं:

•36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में डायबिटीज़ से संबंधित सबसे अधिक 1,123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए।

•21 जुलाई 2026 तक पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए।

•अत्यधिक अनियंत्रित डायबिटीज़ की गंभीर स्थिति को दर्शाने वाला डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक दावा किया गया उपचार पैकेज रहा।

•लंबे समय से नसों और रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान का संकेत देने वाला डायबिटिक फुट दूसरी सबसे बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया।

•अनेक मरीज़ों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन , सीटी/एमआरआई जाँच तथा डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता पड़ी।

•समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और उचित प्रबंधन ही डायबिटीज़ की गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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