न्याय की परंपरा का निर्वहन करने के लिए करना पड़ता है युद्ध : खट्टर - Early News 24

न्याय की परंपरा का निर्वहन करने के लिए करना पड़ता है युद्ध : खट्टर

न्याय की परंपरा का निर्वहन करने के लिए करना पड़ता है युद्ध : खट्टर

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर रविवार को वृंदावन में पहुंचे और वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में ‘षष्ठीपूर्ति महोत्सव’ में शिरकत की। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में परम पूज्या साध्वी ऋतम्भरा को उनके अवतरण दिवस की बधाई दी। इस दौरान विशेष रूप से स्वामी परमानंद गिरी महाराज भी मौजूद रहे और उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को स्मृति चिह्न भी भेंट किया। पिछले रविवार ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज की ओर से हरिद्वार में आयोजित एक अध्यात्मिक महोत्सव में भी शिरकत की।

गौरतलब है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री धर्म परायण व्यक्ति हैं। वे खुद भी अपने व्यस्त समय में से वक्त निकालकर अक्सर तीर्थ स्थलों पर जाते हैं तो साधु-संतों से भी मुलाकात करते हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने हरियाणा में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाने की पहल की तो श्रीमद्भागवत गीता के शोकों को स्कूूली पाठ्यक्रम में भी शामिल करवाया। मुख्यमंत्री स्वयं गीता की एक छोटी प्रति हमेशा अपनी जेब में रखते हैं। वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में हुए महोत्सव के बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘आज प्रभु श्री कृष्ण जी के पावन धाम मथुरा के वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में आयोजित ‘षष्ठीपूर्ति महोत्सव’ में शामिल होकर परम पूज्या दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा जी को अवतरण दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके सुदीर्घ जीवन हेतु कामना की। विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से सेवाकार्य करने वाले संतों-मुनियों के हम आभारी हैं, जो हमारे अंदर संघर्ष और वीरता का भाव जगाते हैं तथा हमें आध्यात्मिकता और धार्मिकता से जोड़ते हुए जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।’ उल्लेखनीय है मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की धर्मपरायणता ही है कि उन्होंने धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के विकास के लिए खास योजना बनाई तो बुजुर्गों को तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाने की भी अनूठी पहल की। इसके साथ ही हरियाणा सरकार की ओर से संतों व महापुरुषों की जयंती राज्यस्तर पर मनाने की भी परपंरा शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने संतों के प्रकल्पों को बताया अनूठा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महोत्सव के दौरान अपने संबोधन में कहा कि न्याय की परंपरा का निवर्हन करने के लिए युद्ध भी करना पड़ता है। उन्होंने वात्सल्य ग्राम में शुरू किए प्रकल्पों को सेवा का अनूठा प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि संत हमको अध्यात्मिकता का और जीवन जीने का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री ने साध्वी ऋतम्बरा की ओर से अध्यात्म के प्रचार-प्रसार को लेकर किए जा रहे प्रकल्पों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं हरियाणा में साध्वी ऋतम्भरा के साथ अध्यात्मिकता के अनेक प्रकल्प किए। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि अयोध्या में जनवरी में ऐतिहासिक कार्यक्रम होगा। इसके लिए हमें लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को हमने एक नई दीवाली मनानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में तो आज हम एक समस्या से जूझ रहे हैं। नशा हरियाणा में युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहा है। इसी साल मई में हमने संतों के सानिध्य में नशे के खिलाफ एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन बढऩा आने वाली पीढ़ी के लिए खतरे का संकेत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाला तो नशे जैसे कलंक को दूर करना एक चुनौती थी, मगर हमने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ सख्त कानून बनाकर इस पर काफी हद तक काबू पा लिया है। कन्या भू्रण हत्या को सामाजिक बुराई बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाई अभियान का आगाज किया और आज 9 वर्षों में लिंगानुपात 871 से सुधरकर 932 हो गया है।

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