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Haryana

Faridabad में पुलिस कमिश्नर के लगातार तबादले, सरकार पर उठ रहे सवाल

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Faridabad में पुलिस कमिश्नर के बार-बार तबादले ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नर का एक स्थान पर टिके रहना जरूरी माना जाता है, ताकि वह शहर की तासीर और समस्याओं को समझ सकें। हालांकि, इस साल के चार महीने में ही दो पुलिस कमिश्नरों के तबादले हो चुके हैं, और अब तीसरे पुलिस कमिश्नर के रूप में आईपीएस सतेंद्र कुमार गुप्ता ने पदभार संभाल लिया है।

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पुलिस कमिश्नर का पद और सरकार की कार्यशैली

Faridabad पुलिस कमिश्नर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुलिस कमिश्नर को शहर के कानून और व्यवस्था की स्थिति को सही तरीके से संचालित करने के लिए कम से कम दो साल तक कार्यरत रहना चाहिए, ताकि वह शहर की सुरक्षा स्थिति को सही से समझ सकें और प्रभावी कदम उठा सकें। लेकिन इस बार चार महीने के भीतर ही तीन पुलिस कमिश्नरों का तबादला किया गया है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

कमिश्नरों के लगातार तबादले

17 अगस्त 2024 को ओपी नरवाल को Faridabad का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए, लेकिन 22 नवंबर 2024 को उनका तबादला कर दिया गया। इसके बाद आईपीएस सौरभ सिंह को कमिश्नर की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सौरभ सिंह का कार्यकाल भी छोटा साबित हुआ, और 23 दिसंबर को उनका भी तबादला कर उन्हें सीआईडी चीफ बना दिया गया। इससे तीन दिन तक कमिश्नर का पद खाली रहा, और अंततः 27 दिसंबर को सतेंद्र कुमार गुप्ता को नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया।

लोगों की चर्चा और सवाल

लोगों के बीच यह चर्चा है कि ओपी नरवाल के कार्यकाल में वह पब्लिक से दूरी बनाए रखते थे, और कई मुद्दों को छिपाने की कोशिश की गई। उदाहरण के तौर पर, आर्यन मिश्रा हत्याकांड, जिसे कथित गो-रक्षकों ने अंजाम दिया, पर पुलिस ने कोई ठोस बयान नहीं दिया, जबकि रेकॉर्ड में आरोपियों का नाम गो-रक्षकों के रूप में दर्ज था। इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार ने अपने हिसाब से अधिकारियों का ट्रांसफर किया है।

सौरभ सिंह का कार्यकाल और उनका स्थानांतरण

सौरभ सिंह के कार्यकाल में पुलिस ने अपराध पर नियंत्रण पाने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने साइबर अपराधियों को पकड़ा और कई पुलिस थानों के ट्रांसफर किए। सूत्रों के अनुसार, सरकार को सीआईडी चीफ के पद के लिए एक मजबूत अधिकारी की आवश्यकता थी, इसीलिए सौरभ सिंह का तबादला किया गया और उन्हें सीआईडी चीफ बना दिया गया। सवाल यह उठता है कि यदि सरकार को पहले ही सौरभ सिंह को सीआईडी चीफ के पद पर नियुक्त करना था, तो यह कदम पहले क्यों नहीं उठाया गया?

इस पूरी स्थिति ने सरकार की कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब फरीदाबाद के नागरिकों में यह चिंता है कि बार-बार पुलिस कमिश्नर का तबादला शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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