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Chandigarh

Satluj Yamuna लिंक नहर को लेकर फिर गर्मायी हरियाणा की सियासत, CM मनोहर लाल PM मोदी से कर चुके हैं मुलाकात

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कई दशकों से चले आ रहे Satluj Yamuna लिंक नहर का मसले को लेकर एक बार फिर से हरियाणा की सियासत में गर्माहट नजर आ रही है। इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 14 अक्तूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक चिट्ठी लिखी और फिर 16 अक्तूबर को इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इससे पहले 3 अक्तूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए द्विपक्षीय बैठक आयोजित करने का आग्रह किया था और 4 अक्तूबर को इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी एक आदेश आया। अब इस मसले को लेकर इनैलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव व ऐलनाबाद के विधायक चौ. अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक चिट्ठी लिखते हुए एस.वाई.एल. के मुद्दे को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने एवं सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग की है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्र एवं हरियाणा सरकार पर इस मसले को लेकर नकारात्मक रवैये का आरोप लगाया है तो आम आदमी पार्टी के प्रचार समिति के चेयरमैन डा. अशोक तंवर ने कहा है कि यह विवाद कई राज्यों के बीच है, ऐसे में इसको लेकर प्रधानमंत्री को संबंधित राज्यों के साथ विशेष बैठक करनी चाहिए।

गौरतलब है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एस.वाई.एल. मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 14 अक्तूूबर को एक चिट्ठी लिखी और इसके बाद 16 अक्तूबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मामले में प्र्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री तथ्यों का हवाला देते हुए कहते हैं सतलुज यमुना लिंक नहर के न बनने से हरियाणा को अब तक 19,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। 46 साल से सिंचाई का पानी नहीं मिलने से दक्षिण हरियाणा की 10 लाख एकड़ कृषि भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच गई है। सबसे अहम बात यह है कि पानी के अभाव में राज्य को हर साल 42 लाख टन खाद्यान्न का भी नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को लागू करने की बजाए पंजाब ने वर्ष 2004 में समझौते निरस्तीकरण अधिनियम बनाकर इनके क्रियान्वयन में रोड़ा अटकाने का प्रयास किया। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधान के अंतर्गत भारत सरकार के आदेश दिनांक 24.3.1976 के अनुसार हरियाणा को रावी-ब्यास के फालतू पानी में से 3.5 एम.ए.एफ. जल का आबंटन किया गया था। एस.वाई.एल. कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से हरियाणा केवल 1.62 एम.ए.एफ. पानी का इस्तेमाल कर रहा है। पंजाब अपने क्षेत्र में एस.वाई.एल. कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न करके हरियाणा के हिस्से के लगभग 1.9 एमएएफ जल का गैर-कानूनी ढंग से उपयोग कर रहा है। पंजाब के इस रवैये के कारण हरियाणा अपने हिस्से का 1.88 एम.ए.एफ. पानी नहीं ले पा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लिखी चिट्ठी में कहा था कि भ वे एस.वाई.एल. नहर के निर्माण के रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा या मुद्दे को हल करने के लिए उनसे मिलने को तैयार हैं, लेकिन अभी तक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से इस चिट्ठी के संदर्भ में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भाजपा-जजपा सरकार के नकारात्मक रवैये से अटका हुआ है एस.वाई.एल. का मामला : भूपेंद्र हुड्डा

पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि भाजपा-जजपा सरकार के नकारात्मक रवैये की वजह से आज तक एस.वाई.एल. का मामला जस का तस अटका हुआ है। जबकि फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पक्ष में स्पष्ट फैसला सुनाया था। इसके बाद जुलाई 2020 में बाकायदा उच्चतम न्यायालय की तरफ से पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे। हुड्डा का कहना है कि कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा के तमाम दलों ने राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। उसी समय कांग्रेस ने प्रदेश सरकार से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलने का सुझाव भी दिया था। सरकार ने इसके लिए प्रधानमंत्री से वक्त मांगने की बात कही थी, लेकिन आज तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा है कि कांग्रेस द्वारा बार-बार कहा गया कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना कर रही है। लेकिन हरियाणा सरकार बेनतीजा बैठकें करके समय व्यतीत करती रही। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एकबार फिर अपने फैसले को दोहराया गया है, लेकिन हैरानी की बात है कि हरियाणा के हक का पानी लेने की बात को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री इसे सिर्फ नहर निर्माण का मामला मानकर चल रहे हैं, जबकि एस.वाई.एल. का पानी हरियाणा का हक है और ये प्रदेश की किसानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए । यह पानी मिलने से प्रदेश की 10 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि पर सिंचाई संभव हो पाएगी। हरियाणा कांग्रेस ने कोर्ट से लेकर हर मंच पर प्रदेश के हक की लड़ाई लड़ी है। कोर्ट में कांग्रेस सरकार ने मजबूती के साथ हरियाणा का पक्ष रखा, जिसके चलते प्रदेश के हक में कोर्ट का फैसला आया। लेकिन इसको अमलीजामा पहनाने के लिए भाजपा सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। प्रदेश में अक्सर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच बहस होती है कि कौन-सी पार्टी की सरकार में एसवाईएल बनवाने के लिए कितना काम हुआ, लेकिन बीजेपी हरियाणा के इतिहास की इकलौती ऐसी सरकार है, जिसमें काम आगे बढऩे की बजाय पंजाब के क्षेत्र में बनी-बनाई एसवाईएल नहर को पाट दिया गया। यानी अब तक हरियाणा को उसके हक का पानी दिलवाने के मामले में बीजेपी और बीजेपी-जेजेपी सरकार की भूमिका नकारात्मक रही है।

अभय चौटाला ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

इनैलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक चौ. अभय सिंह चौटाला ने दो दिन पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल को एक चिट्ठी लिखते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के अलावा सर्वदलीय बैठक का आयोजन करने की मांग की है। अभय चौटाला का कहना है कि हरियाणा में पिछले 18 वर्ष से एस.वाई.एल. के मुद्दे पर पंजाब सरकार द्वारा लगातार रुकावटें पैदा की जा रही हैं। खासतौर पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 10 नवंबर 2016 को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए नहर निर्माण का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वे अपनी देखरेख में पंजाब क्षेत्र में नहर की खुदाई का काम शीघ्र पूरा करवाए, लेकिन पंजाब सरकार ने अपने नकारात्मक रवैये के कारण उसमें कोई प्रगति नहीं की, जिससे हरियाणा के हितों की लगातार अनदेखी हो रही है। अभय चौटाला का कहना है कि इस साल 4 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्टï किया कि अधिग्रहित भूमि की सुरक्षा व नहर के निर्माण बारे पंजाब व केंद्र सरकार तत्काल प्रभावी कदम उठाए, परंतु इस निर्देश के बाद पंजाब सरकार व विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से उतेजनापूर्ण व भडक़ाऊ बयानबाजी की जा रही है, जो अपने आप में सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है। इंडियन नेशनल लोकदल का शुरू से ही यह मानना रहा है कि हरियाणा के हिस्से का पानी हरियाणा के किसानों को जल्द मिले और यह तभी संभव हो सकता है, जब एसवाईएल का निर्माण केंद्र सरकार की देखरेख में तत्काल प्रभाव से पूर्ण करवाया जाए।

केंद्र सरकार को करना चाहिए हस्तक्षेप : डा. अशोक तंवर

आम आदमी पार्टी हरियाणा इकाई के प्रचार समिति के चेयरमैन डा. अशोक तंवर का कहना है कि जबसे हरियाणा का गठन हुआ, तब से अब तक कई बार पानी के बंटवारे को लेकर विवाद हुए, प्रदर्शन हुए। सारी पार्टियों की या देश के शीर्ष नेतृत्व की या हरियाणा के शीर्ष नेतृत्व की अगर नीयत साफ है तो हरियाणा को पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब से हरियाणा बना और यह मुद्दा उठा है तब से इस मुद्दे का राजनीतिकरण होता चला आया है, जबकि जिस स्तर पर गंभीर प्रयास होने चाहिए थे, वे नहीं हुए हैं। चूंकि यह मामला कई राज्यों से जुड़ा है, इसका हल केंद्र सरकार द्वारा ही किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वे सभी संबधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक साथ बैठाकर इसका हल करवाएं और सभी राज्यों को उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। डा. तंवर का कहना कि आम आदमी पार्टी का यह शुरू से ही स्टैंड रहा है कि हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिलना ही चाहिए, मगर गंभीरता से प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जब चुनाव सिर पर हैं तो ऐसे में इस मुद्दे को फिर से उठाया जा रहा है, जबकि सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण कार्य राजनीति से हटकर तेजी से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कई प्रदेशों का मसला है। ऐसे में इस विषय की गंभीरता को समझते हुए प्रधानमंत्री को संबंधित राज्यों के साथ बैठक करनी चाहिए। जहां तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सवाल है और यह फैसला पहले भी आया। सभी जानते हैं कि नवंबर 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था तब केंद्र में भाजपा की सरकार थी और पंजाब में शिरोमणि अकाली दल एवं भाजपा गठबंधन सरकार थी। भाजपा के मुख्यमंत्री हों, वे समय नहीं दिलवा पाए और प्रधानमंत्री ने समय नहीं दिया और यह मामला टलता गया। अब चूंकि केंद्र व हरियाणा में भाजपा की सरकारें हैं और इस दिशा में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को गंभीरता से प्रयास करते हुए इस मुद्दे का हल करना चाहिए।

हरियाणा को मिले अपने हिस्से का पानी : दिग्विजय  चौटाला

जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला का कहना है कि सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण जल्द पूरा हो और हरियाणा को जल्द उसके हिस्से का पानी मिले। उन्होंने कहा कि एसवाईएल का पानी हरियाणा का हक है और उसको हम लेकर रहेंगे। अभी हाल में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पंजाब सरकार का झूठा और गैर जिम्मेदाराना रवैया उजागर हुआ है और अब पंजाब सरकार को किसी अहंकार में नहीं रहना चाहिए। पंजाब सरकार के पास अभी भी समय है, वे हरियाणा का हक छीनने का प्रयास न करें। केंद्र सरकार की ओर से पैरामिलिट्री फोर्स लगाकर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के तहत एस.वाई.एल. नहर का निर्माण करवाया जाए, ताकि हरियाणा के किसानों को अपने हिस्से का पानी मिले। दिग्विजय चौटाला का कहना है कि सतलुज-यमुना लिंक नहर का विवाद दशकों से चला आ रहा है। पंजाब हमेशा कम पानी होने का दावा करता है। सुप्रीम कोर्ट हरियाणा के हक का पानी देने को लेकर हमारे पक्ष में निर्णय दे चुका है। ऐसे में अब एस.वाई.एल. के निर्माण और हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिलने को लेकर कोइ संशय नहीं होना चाहिए।

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Chandigarh News : आखिर अमरुद घोटाला है क्या ? पंजाब के 22 ठिकानों पर ED की कार्रवाई

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Enforcement directorate

Ghuva Scam : अमरुद बाग घोटाले को लेकर सूचना निदेशालय (ईडी) एक्शन मोड में है। पंजाब सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन में अमरूद के बाग दिखाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने जांच तेज कर दी है. टीम ने बुधवार को चंडीगढ़, मोहाली और फिरोजपुर समेत 22 जगहों पर छापेमारी की.

इस बीच टीम पंजाब के आईएएस वरुण रुजम के घर भी पहुंची. टीम को मौजूदा एक्साइज कमिश्नर वरुण रूजम के घर के पीछे एक पार्क में कुछ फटे हुए दस्तावेज मिले. इन दस्तावेज़ों में अमरूद के बागानों का उल्लेख है। ईडी को शक है कि खुद को बचाने के लिए दस्तावेजों को फाड़कर फेंक दिया गया.

इसके साथ ही वरुण की पत्नी पर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये का मुआवजा लेने का भी आरोप है. इसके अलावा फिरोजपुर के डीसी राजेश धीमान की पत्नी भी इस मामले में आरोपी हैं. इसके साथ ही ईडी कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों के घरों तक पहुंची है. ईडी लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही थी। इसके मुताबिक गमाडा से सारा रिकार्ड कब्जे में ले लिया गया है।

पता चला है कि इन टीमों में ईडी जालंधर के अधिकारी भी शामिल हैं. ये टीमें स्थानीय पुलिस को भी साथ लेकर आई हैं। इसके साथ ही इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है. इस बीच जो लोग घरों में मिले उन्हें अंदर ले जाया गया। किसी को फोन आदि करने की इजाजत नहीं थी।

आपको बता दें कि मामला ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा एयरपोर्ट रोड पर एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है. गमाडा द्वारा अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत दिया गया था। उस जमीन में लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत जमीन से अलग दी जाती थी।

उद्यान विभाग द्वारा फलदार वृक्षों की कीमत तय की गई। इसके बाद, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने बागवानी निदेशक को फलों के पेड़ों की एक सर्वेक्षण सूची भेजी और पेड़ों की एक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की।

जमीन अधिग्रहण से पहले कुछ लोगों ने यहां अमरूद के पौधे लगाए थे, लेकिन गमाडा अधिकारियों के मुताबिक उनकी उम्र 4 से 5 साल बताई जा रही है। इससे उनका मुआवज़ा काफी बढ़ गया. इस तरह एक साथ कई लोगों को गलत तरीके से मुआवजा मिल गया. इस मामले में विजिलेंस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन मुआवजा राशि वापस जमा कराने पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

इस मामले में आरोपियों ने मुआवजा पाने के लिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन पर मानक से अधिक अमरूद के पेड़ लगा दिए थे। आरोप है कि जमीन के पट्टाधारकों ने प्रति एकड़ 2000 से 2500 पेड़ दिखाए। यह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की प्रति एकड़ 132 पेड़ों की सिफारिश से कहीं अधिक था।

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Chandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?

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ये चंडीगढ़ के शीर्ष 10 रेस्तरां हैं। ये रेस्तरां चंडीगढ़ में विविध पाक दृश्य को दर्शाते हैं, जो बढ़िया भोजन से लेकर अनौपचारिक भोजनालयों तक भोजन के अनुभवों की एक श्रृंखला प्रदान करते हैं, और दुनिया भर के विभिन्न व्यंजनों को प्रदर्शित करते हैं।

Virgin Courtyard : वर्जिन कोर्टयार्ड एक बढ़िया भोजनालय है जो अपने रोमांटिक माहौल और इतालवी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। यह बाहर बैठने के साथ एक आकर्षक वातावरण प्रदान करता है, जो रोमांटिक रात्रिभोज या विशेष अवसरों के लिए एकदम सही है। मेन्यू में विभिन्न प्रकार के प्रामाणिक इतालवी व्यंजन जैसे पास्ता, रिसोटो, लकड़ी से बने पिज्जा और स्वादिष्ट मिठाई शामिल हैं। रेस्तरां भोजन के पूरक के रूप में बढ़िया वाइन का चयन भी प्रदान करता है। Location: SCO 1A, Madhya Marg, Sector 7C, Chandigarh.


Swagath Restaurant & Bar: स्वागत रेस्तरां और बार अपने प्रामाणिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। रेस्तरां ताजा सामग्री और सुगंधित मसालों के साथ तैयार किए गए पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों का एक विविध मेनू प्रदान करता है। डोसा और इडली से लेकर स्वादिष्ट करी और बिरयानी तक, स्वागत व्यंजनों की एक रमणीय श्रृंखला परोसता है जो दक्षिण भारतीय स्वादों के सार को पकड़ता है। रेस्तरां का आकर्षक माहौल और चौकस सेवा भोजन के अनुभव को बढ़ाती है। Location: SCO 7, Sector 26, Chandigarh.


Pal Dhaba: पाल ढाबा एक लोकप्रिय भोजनालय है जो अपने उत्तर भारतीय और पंजाबी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इसमें एक देहाती माहौल है जो पारंपरिक पंजाबी ढाबों के आकर्षण को दर्शाता है। पाल ढाबा अपने मुँह में पानी लाने वाले तंदूरी व्यंजनों, रसीले कबाब, समृद्ध करी और ताज़ी पकाई हुई रोटी के लिए प्रसिद्ध है। रेस्तरां के हार्दिक और स्वादिष्ट भोजन, इसके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के साथ, इसे स्थानीय लोगों और आगंतुकों के बीच समान रूप से पसंदीदा बना दिया है। Location: SCO 151 & 152, Sector 28 D, Sector 28, Chandigarh.

Nandoo’s: नंदो एक प्रसिद्ध श्रृंखला रेस्तरां है जो लौ-ग्रिल्ड पेरी-पेरी चिकन में विशेषज्ञता रखता है। दक्षिण अफ्रीका से उत्पन्न, नंदो अपने विशिष्ट पेरी-पेरी मैरिनेड के साथ एक अनूठा भोजन अनुभव प्रदान करता है, जो चिकन को मसालेदार और तीखे स्वादों से भर देता है। अपने प्रसिद्ध चिकन व्यंजनों के अलावा, नंदो के मेनू में विभिन्न प्रकार के साइड, सलाद और मिठाई शामिल हैं, जो सभी उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और मोटे मसालों के साथ तैयार किए जाते हैं। Location: Elante Mall, 178-178A, Purv Marg, Industrial Area Phase I, Chandigarh.


Whistling Duck: व्हिसलिंग डक एक ट्रेंडी रेस्तरां है जो वैश्विक व्यंजनों की विशेषता वाले अपने विविध मेनू के लिए जाना जाता है। रेस्तरां आधुनिक सजावट और आरामदायक बैठने के साथ एक जीवंत वातावरण प्रदान करता है। मेन्यू में दुनिया भर के स्वादों का मिश्रण शामिल है, जिसमें एशियाई स्टिर-फ्राइज़ और भूमध्यसागरीय सलाद से लेकर अमेरिकी बर्गर और मैक्सिकन टैको तक के विकल्प शामिल हैं। व्हिसलिंग डक में एक अच्छी तरह से भंडारित बार भी है जो कॉकटेल, वाइन और स्पिरिट के चयन परोसता है। Location: SCO 10, Back Lane, Sector 26, Chandigarh.


Brooklyn Central: ब्रुकलिन सेंट्रल एक लोकप्रिय रेस्तरां है जो अपने अमेरिकी शैली के भोजन और जीवंत वातावरण के लिए जाना जाता है। ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क के अनौपचारिक भोजन दृश्य से प्रेरित, रेस्तरां बर्गर, सैंडविच, रिब्स और स्टीक्स जैसे क्लासिक अमेरिकी व्यंजनों की विशेषता वाला एक मेनू प्रदान करता है। अपने जीवंत वातावरण, औद्योगिक-चिक सजावट और मैत्रीपूर्ण सेवा के साथ, ब्रुकलिन सेंट्रल भोजन करने वालों के लिए एक आधुनिक मोड़ के साथ आरामदायक भोजन का आनंद लेने के लिए एक स्वागत योग्य स्थान प्रदान करता है। Location: SCO 20, Madhya Marg, Sector 26, Chandigarh.


Café JC’s: कैफे जेसी एक आरामदायक कैफे है जो अपने आरामदायक माहौल और महाद्वीपीय और इतालवी व्यंजनों के विविध मेनू के लिए जाना जाता है। कैफे इनडोर और आउटडोर बैठने के विकल्पों के साथ एक आकर्षक सेटिंग प्रदान करता है। मेन्यू में नाश्ते के सामान, सैंडविच, सलाद, पास्ता और लकड़ी से बने पिज्जा शामिल हैं, जो सभी ताजा और स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्री का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं। कैफे जेसी कॉफी, चाय, स्मूदी और मॉकटेल सहित पेय पदार्थों का चयन भी प्रदान करता है। Location: SCO 437 & 438, Sector 35C, Chandigarh.


The Willow Cafe: द विलो कैफे एक अनोखा भोजनालय है जो अपने शांत वातावरण और शाकाहारी-अनुकूल भोजन के लिए जाना जाता है। कैफे एक आरामदायक और स्वागत योग्य वातावरण प्रदान करता है, जिसमें अंदर और बाहर हरियाली से घिरा हुआ है। मेन्यू में सलाद, सैंडविच, रैप्स, सूप और भारतीय विशेषताओं सहित विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और शाकाहारी विकल्प शामिल हैं। विलो कैफे जैविक और टिकाऊ सामग्री का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भोजन करने वालों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। Location: Shop 1, Inner Market, Sector 10 D, Chandigarh.

Gustoso: गुस्टोसो एक प्रामाणिक इतालवी रेस्तरां है जो अपने लकड़ी से बने पिज्जा और क्लासिक इतालवी व्यंजनों के लिए जाना जाता है। रेस्तरां गर्म रोशनी और सुरुचिपूर्ण सजावट के साथ एक स्टाइलिश और समकालीन सेटिंग प्रदान करता है। मेन्यू में एंटीपास्टी, पास्ता, रिसोटस और मुख्य व्यंजनों की एक श्रृंखला है, जो सभी प्रामाणिक इतालवी स्वादों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के साथ तैयार किए जाते हैं। गुस्टोसो के पास भोजन के अनुभव के पूरक के रूप में इतालवी वाइन प्रदर्शित करने वाली वाइन की एक विस्तृत सूची भी है। Location: SCO 16 & 17, Madhya Marg, Sector 7C, Chandigarh.


Hops n Grains: हॉप्स एन ग्रेन्स एक सूक्ष्म शराब बनाने की दुकान और रेस्तरां है जो अपने शिल्प बियर और स्वादिष्ट भोजन प्रसाद के लिए जाना जाता है। शराब बनाने की दुकान पारंपरिक शराब बनाने की तकनीकों और प्रीमियम सामग्री का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित बीयर का उत्पादन करती है, जिसमें लेजर्स, एल्स और स्टाउट्स शामिल हैं। अपने बीयर के अलावा, हॉप्स एन ग्रेन्स ऐपेटाइज़र, बर्गर, पिज्जा, कबाब और भारतीय विशिष्टताओं का एक विविध मेनू प्रदान करता है, जो सभी अपने पेय के साथ पूरी तरह से जोड़ी बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। जीवंत वातावरण, जीवंत संगीत और मैत्रीपूर्ण सेवा हॉप्स एन ग्रेन्स को बीयर के शौकीनों और भोजन प्रेमियों के लिए समान रूप से एक लोकप्रिय गंतव्य बनाती है। Location: SCO 358, Sector 9, Panchkula, Chandigarh.

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Chandigarh में डीजल बसों की जगह चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

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यूटी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ट्राइसिटी रूटों पर 100 डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का फैसला किया है। राज्य स्तरीय संचालन समिति की पहली बैठक में अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने केंद्र प्रायोजित “प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना” के तहत चंडीगढ़ को 100 बसें आवंटित की हैं। इसके बाद समिति ने 100 डीजल बसों के प्रतिस्थापन की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।

योजना के तहत, केंद्र 12 मीटर की बस के लिए 10 वर्षों तक प्रति वर्ष 5% की दर से बढ़ोतरी के साथ ₹24/किमी का भुगतान करेगा। सहायता प्रदान की जाएगी. इसके अलावा यूटी को मीटर के पीछे बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए 100% केंद्रीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। यूटी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा मीटर के पीछे बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए 11.87 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया है, जिसे मंत्रालय को भेजा गया था, जिसने इसे मंजूरी दे दी है और यह राशि राज्य की नोडल एजेंसी के खाते में जमा कर दी जाएगी।

समिति को बताया गया कि सीईपीटी विश्वविद्यालय ने 2022 से 2031 के लिए खरीद रणनीति के साथ शहर के लिए एक संशोधित बस और सेवा योजना प्रस्तुत की है। समिति को सूचित किया गया कि सी.ई.पी.टी. प्रतिबंध के खिलाफ बस प्रतिस्थापन और सिटी बस सेवाओं के लिए बेड़े को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा एक चरणबद्ध खरीद योजना बनाई गई थी। समिति ट्राइसिटी मार्गों पर 70 बसें जोड़कर सिटी बसों के परिचालन बेड़े को मजबूत करने पर सहमत हुई है।

इस योजना का उद्देश्य उन लोगों के बीच सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है जो निजी वाहन पसंद करते हैं। अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय से पीएम ई-बस सेवा के तहत 70 और बसें आवंटित करने का अनुरोध किया जाएगा। समिति ने यूटी के मुख्य अभियंता को बुनियादी ढांचे के लिए जल्द ही ई-टेंडर बुलाने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बसों की डिलीवरी से पहले चार्जिंग तैयार हो जाएगी।

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