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Trump सरकार की सख़्ती: English Test में fail होने पर 7 हज़ार से ज़्यादा Truck Drivers के Licenses रद्द, सबसे ज़्यादा असर भारतीयों पर

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अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों पर ट्रंप सरकार ने अब सख़्ती शुरू कर दी है। सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि अब हर ट्रक ड्राइवर को English बोलना, पढ़ना और समझना ज़रूरी होगा।
अगर कोई ड्राइवर ट्रैफ़िक साइन नहीं पढ़ पाता या पुलिस से इंग्लिश में बात नहीं कर पाता, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।

क्या है मामला

अमेरिकी Federal Motor Carrier Safety Administration (FMCSA) के नियम के मुताबिक़, हर कमर्शियल ट्रक ड्राइवर के लिए “English proficiency” यानी इंग्लिश में संवाद करने की क्षमता अनिवार्य है।
पहले भी यह नियम था, लेकिन अब ट्रंप सरकार ने इसे सख़्ती से लागू करना शुरू कर दिया है।

अक्टूबर 2025 तक के आँकड़ों के अनुसार, 7,000 से ज़्यादा ड्राइवर ऐसे हैं जो इंग्लिश टेस्ट में फेल हो चुके हैं।
इन ड्राइवरों को “out-of-service” यानी सड़क पर काम करने से रोका गया है।

कैसे लिए जा रहे हैं टेस्ट

नए नियम के तहत अब पुलिस रोड पर ही ड्राइवरों का इंग्लिश टेस्ट ले रही है
ड्राइवर से कुछ इंग्लिश में सवाल पूछे जाते हैं — जैसे ट्रैफ़िक साइन का मतलब, या साधारण बातचीत।
अगर ड्राइवर ठीक से जवाब नहीं दे पाता, तो उसे तुरंत ट्रक से उतार दिया जाता है और उसका लाइसेंस जांच के लिए रोक लिया जाता है।

भारतीय ड्राइवरों पर असर

अमेरिका में लगभग 1.30 से 1.50 लाख भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर हैं, जिनमें ज़्यादातर पंजाब और हरियाणा से हैं।
इनमें से बड़ी संख्या में ड्राइवर इंग्लिश में बहुत फ़्लुएंट नहीं हैं।
कई ड्राइवर इंग्लिश टेस्ट में फेल हो चुके हैं, जिसकी वजह से उनके काम और रोज़गार पर सीधा असर पड़ा है।

Moneycontrol और Indian Express की रिपोर्ट्स के मुताबिक,
कई पंजाबी ड्राइवर इंग्लिश में बोलने या इंग्लिश में लिखे ट्रैफ़िक साइन समझने में मुश्किल महसूस करते हैं।
ऐसे ड्राइवरों के लाइसेंस अस्थायी रूप से रद्द या सस्पेंड कर दिए गए हैं।

अमेरिका में बढ़ते हादसे और नई नीति

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ सालों में ट्रक एक्सीडेंट्स की संख्या बढ़ी है।
सरकार का मानना है कि इनमें से कई हादसे कम्युनिकेशन गैप यानी इंग्लिश न समझ पाने की वजह से हुए।
इसी कारण से, 25 जून 2025 से यह नया नियम लागू किया गया है।

अमेरिकी ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी सीन डफी ने बताया कि अब बिना इंग्लिश जाने कोई भी व्यक्ति ट्रक नहीं चला सकेगा।
हर ड्राइवर को इंग्लिश में ट्रैफ़िक साइन पढ़ना, समझना और पुलिस से बात करने में सक्षम होना ज़रूरी है।

राज्यों पर भी दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने उन राज्यों पर दबाव डाला है जहाँ यह नियम ठीक से लागू नहीं हो रहा।
कैलिफोर्निया जैसे कुछ राज्यों को तो चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने इंग्लिश नियम लागू नहीं किया,
तो उनके $40.6 मिलियन (करीब 340 करोड़ रुपये) तक के फंड रोक दिए जाएंगे।

वीज़ा पॉलिसी पर असर

इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) ने भी हाल ही में
ट्रक ड्राइवरों के एम्प्लॉयमेंट वीज़ा पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
इसका सीधा असर भारत से जाने वाले नए ड्राइवरों पर पड़ा है।

ड्राइवरों की राय

कई भारतीय ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें नियमों से परेशानी नहीं,
पर अचानक इतने सख़्त टेस्ट और इंग्लिश बोलने की शर्त ने उनका काम छीन लिया है।
उनका कहना है कि हम अच्छे ड्राइवर हैं, लेकिन हर किसी को इंग्लिश बोलना ज़रूरी नहीं होना चाहिए।”

ट्रंप सरकार के इस फ़ैसले से अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों भारतीय ट्रक ड्राइवरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सरकार इसे “सुरक्षा के लिए ज़रूरी” बता रही है, जबकि ड्राइवर समुदाय इसे “भेदभाव” और “रोज़गार पर वार” मान रहा है।
अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में यह नीति कितनी सख़्ती से लागू रहती है
और क्या प्रभावित ड्राइवरों को कोई राहत मिलती है या नहीं।

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