रामलला का लाइव प्राण प्रतिष्ठा समारोह देखकर साक्षी महाराज हुए भावुक, बोले- यह आंसू निःशब्द हैं, जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता - Early News 24

रामलला का लाइव प्राण प्रतिष्ठा समारोह देखकर साक्षी महाराज हुए भावुक, बोले- यह आंसू निःशब्द हैं, जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता

रामलला का लाइव प्राण प्रतिष्ठा समारोह देखकर साक्षी महाराज हुए भावुक, बोले- यह आंसू निःशब्द हैं, जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता

उन्नाव: अयोध्या में हुये प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को सांसद साक्षी महाराज ने अपने संसदीय कार्यालय में लाइव प्रसारण के जरिया देखा। इस दौरान उनके आंखों में आंसू देखे गये। उन्होंने कहा इस दिन का मुझे इंतजार था, जो आज पूरा हुआ है। यह कल्याणकारी दिन कभी दोबारा नहीं हो सकता है। लोगों को आज के दिन का बेसब्री से इंतजार था। अयोध्या में हुये प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान उन्नाव में लोग बड़े ही जोश और उत्साह के साथ जगह-जगह पर पूजन व भंडारे का आयोजन कर रहे हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूजा अर्चना की जा रही है। इसी बीच सांसद साक्षी महाराज ने अपने संसदीय कार्यालय में अयोध्या में हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लाइव प्रसारण के जरिया देखा है।

पता नहीं मैं कैसे बच गया, मुझे भी गोली लग सकती थी
इस दौरान उनके आंखों में आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि मैं प्रत्यक्षदर्शी हूं। 1990 में जिस तरह से एक क्रूर शासक ने राम भक्तों का नरसंहार किया था। पता नहीं मैं कैसे बच गया, मुझे भी गोली लग सकती थी। कोठारी बन्धु मेरे साथ ही थे। वह दृश्य जो मैंने देखा उसके बाद 1992 में 6 दिसंबर वाला भी दृश्य देखा। उसका भी मैं साक्षी हूं और आज का दृश्य देखकर मैं अपने को संभाल नहीं पाया।

यह आंसू निःशब्द हैं, जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता
साक्षी महाराज ने कहा कि यह अयोध्या में हुये प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम दुख के नहीं थे। यह आंसू निःशब्द हैं, जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। एक साक्षी महाराज के आंखों से आंसू नहीं बल्कि जितने भी राम भक्त हैं। सभी का मन भावुक होगा। आज का दिन भारत के इतिहास में इससे ज्यादा कल्याणकारी सुख देने वाला कोई दूसरा दिन नहीं हो सकता है। इसलिए मैं अपने आप को नहीं संभाल पाया और आंखों में आंसू आ गये, जो रुक नहीं पा रहे हैं। विपक्ष के द्वारा लाइव प्रसारण पर रोक लगायी जाने का बयान पर उन्होंने कहा कि पहले भी सत्ता पर आसीन लोग ऐसा करते रहे हैं। ऐसा कंस ने भी किया था। इन लोगों को राम से प्यार होता तो राम भक्तों की हत्या करने वालों के साथ इनका समझोता ना होता।

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