पतंगों का बाजार हुआ गुलजारः अयोध्या में महोत्सव से बढ़ी बिक्री, दुकानदारों के खिल उठे चेहरे - Early News 24

पतंगों का बाजार हुआ गुलजारः अयोध्या में महोत्सव से बढ़ी बिक्री, दुकानदारों के खिल उठे चेहरे

पतंगों का बाजार हुआ गुलजारः अयोध्या में महोत्सव से बढ़ी बिक्री, दुकानदारों के खिल उठे चेहरे

बरेली: अयोध्या में पतंग महोत्सव के चलते पतंगों की बिक्री दोगुनी हो गई है। मकर संक्रांति की वजह से भी पतंगों की मांग बढ़ गई है। इससे दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं। उनका कहना है कि आमदिनों में बिक्री सामान्य रहती, मगर इस वक्त मांग अधिक है। लोग घरों को सजाने के लिए भी पतंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भगवा रंग की पतंग ज्यादा पसंद की जा रही है। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पतंग महोत्सव भी आयोजित हो रहा है। बरेली से भी पतंगों की खरीदारी की जा रही है। इसलिए भी पतंगों की मांग बढ़ी है। करीब दस हजार परिवार पतंग और माझा बनाने का काम करते हैं। शहर में लगभग 150 , दुकानें पतंगों की हैं, जहां से थोक और फुटकर पतंगों की बिक्री होती बता है। दुकानदारों के अनुसार यहां से महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पंजाब आदि प्रांतों में पतंगों की सप्लाई होती है। कागज के साथ पन्नी की भी पतंगें तैयार कर बेची जा रही हैं। मांझे की अलग-अलग वैरायटी हैं।

मांझे की भी कई वैरायटीः
किला निवासी मांझा कारीगर आरिफ ने बताया कि मांझे की गुणवत्ता के अनुसार बिक्री होती है। यह छह छोटे और पतले धागों को मिलाकर बनाया जाता है। कम हवा में भी इस मांझे से बड़ी आसानी से पतंगें उड़ती हैं। इसकी मांग ज्यादातर मैदानी इलाकों में होती है। दूसरा मांझा नौ कॉर्ड का बनाया जाता है। नौ धागों को जोड़कर बनाया गया मांझा सबसे अच्छा होता है। इसमें धार भी अच्छी होती ह। 12 कॉर्ड का भी मांझा बनाया जाता है।

लाखों का माल तैयार किया जा रहाः रेहान अली
मोहल्ला रेती निवासी रेहान अली ने बताया कि इस बार मध्य प्रदेश, उत्तराखंड आदि प्रांतों के अलावा जम्मू कश्मीर से भी पतंग और मांझे की डिमांड आई है। इन राज्यों के लिए लाखों का माल तैयार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मांग जयपुर से है।

मोदी-योगी नाम के पतंग की मांग अधिक
मोहल्ला रेती निवासी गुलफाम सलमानी ने बताया कि लखनऊ में बड़े पैमाने पर पतंग और मांझे का कारोबार होता है, बावजूद बरेली के मांझे के साथ ही पतंग की भारी मांग है। मोदी-योगी नाम के पतंग की मांग अधिक। यहां के मांझे की गुणवत्ता अच्छी होती है।

इन स्थानों पर हो रहा पतंग बनाने का काम
स्वालेनगर, बाकरगंज, रेती, जकीरा, जसौली, किला छावनी आदि स्थानों पर रहने वाले परिवार पतंग बनाने काम कर रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार पतंग एक से लेकर ढाई सौ रुपये तक की उपलब्ध है। मांझे की सादा चरखी 50 तो सजावटी चरखी 360 से 800 रुपये तक की है। पतग बनाने का कच्चा माल तमिलनाडु के मदुरै और पंजाब के होशियारपुर से आता है।

गुजरात से भी पतंगों की मांग
सराय गली में पतंगों के थोक विक्रेता इनाम अली ने बताया कि शहर बंधन पर अधिक पतंग की खरीदारी होती है। जबकि अन्य राज्यों में यहां से बड़ी संख्या में पतंगों की सप्लाई होती है ।इस समय गुजरात में मकर संक्रांति की वजह से मांग ज्यादा है, उसके बाद राजस्थान में पतंग उत्सव मनाया जाएगा, फिर वहां सप्लाई होगी। महाराष्ट्र में भी पतंगों से जुड़े कई उत्सव होते हैं। वहां से भी आर्डर आते हैं।

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