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Chandigarh

Raja Vading  के Statement पर ‘AAP’ का हमला – कहा, नशे से उजड़े परिवारों का अपमान कर रहे हैं Vading, अफीम-डोडे की वकालत शर्मनाक

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पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की ओर से अफीम और भुक्की (डोडा) के ठेके खोलने संबंधी दिए गए बयान पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा एतराज़ जताया है। ‘आप’ नेताओं ने इसे नशे से उजड़े परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है और वड़िंग के बयान को बेहद गैर जिम्मेदाराना करार दिया।

‘आप’ नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि यह बयान साफ दर्शाता है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि पंजाब से नशा खत्म हो। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक नशा छुड़ाकर दूसरा नशा पकड़ाना चाहती है। बलतेज पन्नू ने कहा कि आप सरकार पिछले दो महीनों से ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ जैसे बड़े अभियान के तहत पंजाब में नशे के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रही है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के इस तरह के बयान इस मुहिम को कमजोर करने की साज़िश हैं।

बलतेज पन्नू ने सवाल उठाया – “क्या राजा वड़िंग यह साबित करना चाहते हैं कि पंजाब की जनता नशे के बिना नहीं रह सकती?” उन्होंने कहा कि अफीम और डोडा जैसे नशे को लीगल करना, उस दर्द की अनदेखी है जिसे हज़ारों परिवार आज भी झेल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वड़िंग को शायद नशे से जुड़ा कोई निजी अनुभव है, तभी वे इस तरह की बात कर रहे हैं।

‘नशा नहीं, शिक्षा और रोजगार चाहिए’ – नील गर्ग
‘आप’ के प्रवक्ता नील गर्ग ने भी वड़िंग के बयान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के नौजवानों को नशे की नहीं, शिक्षा और रोजगार की जरूरत है। नील गर्ग बोले – “जब किसी युवा को अच्छा स्कूल, कॉलेज और नौकरी मिलेगी, तो वह खुद-ब-खुद नशे से दूर रहेगा। लेकिन कांग्रेस इस असली समस्या का हल नहीं चाहती, इसलिए भटकाने वाली बातें कर रही है।”

नील गर्ग ने आगे कहा कि पंजाब की दो पीढ़ियां नशे की चपेट में आकर उजड़ चुकी हैं। हजारों घर बर्बाद हो चुके हैं, माता-पिता ने अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए विदेश भेजना शुरू कर दिया है। पंजाब की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई है।

‘कांग्रेस को अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए’
बलतेज पन्नू ने कहा कि कांग्रेस को अपने नेताओं के बयानों पर लगाम लगानी चाहिए और उन्हें ऐसी बयानबाज़ी से रोकना चाहिए जो नशे को बढ़ावा देती हो। उन्होंने कहा कि अगर नशे के जख्मों पर मरहम लगाना है तो सभी राजनीतिक पार्टियों को मिलकर काम करना होगा, न कि लोगों की तकलीफों का मज़ाक उड़ाना।
पंजाब में नशे की समस्या किसी भी राजनीतिक बयानबाज़ी से कहीं बड़ी है। इस पर सियासत नहीं, गंभीरता से काम करने की जरूरत है। अगर सच में पंजाब को बचाना है तो हर नेता को अपने शब्दों और नीयत दोनों पर ध्यान देना होगा।

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