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Bhagwant Mann का ‘Operation Sindoor’ पर बयान बना विवाद का कारण, BJP ने बताया राष्ट्र का अपमान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने एक गंभीर आतंकवाद विरोधी मिशन ऑपरेशन सिंदूर” पर टिप्पणी कर दी, जिसे बीजेपी ने बेहद आपत्तिजनक, शर्मनाक और महिलाओं व शहीदों का अपमान बताया है।

दरअसल, हाल ही में भगवंत मान ने ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर तंज कसते हुए कहा – अब मोदी के नाम का सिंदूर लगाओगे? ये कैसा वन नेशन, वन हसबैंड है?” उनका ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके बाद विवाद गहराता गया।

क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

BJP के अनुसार, यह कोई प्रतीकात्मक या राजनीतिक कैंपेन नहीं था, बल्कि एक सीरियस काउंटर-टेरर ऑपरेशन था। जानकारी के मुताबिक, कुछ आतंकवादी सिंदूर देखकर हिंदू महिलाओं की पहचान कर रहे थे और उन्हें टारगेट बना रहे थे। इसी वजह से इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन सिंदूर” रखा गया।

बीजेपी का तीखा हमला

BJP पंजाब के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने इस पर कड़ा रिएक्शन देते हुए कहा कि:

  • भगवंत मान का यह बयान शहीदों के परिवारों, भारतीय महिलाओं और देश की सुरक्षा एजेंसियों के जज्बे का मजाक है।
  • यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि देश और संस्कृति का अपमान है।
  • उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब किसी जिम्मेदार नेता की तरह नहीं, बल्कि स्टैंडअप कॉमेडियन की तरह पेश आ रहे हैं, जो सिर्फ तालियां चाहता है, न कि जवाबदेही।”

बलियावाल ने ये भी साफ किया कि:

  • “कोई सिंदूर भेजने की बीजेपी की कैंपेन नहीं है।”
  • “ऑपरेशन सिंदूर” एक वास्तविक और जमीन पर चला आतंकवाद विरोधी मिशन था, जिसका मकसद निर्दोष महिलाओं की जान बचाना था।

मांग की माफी और इस्तीफे की

प्रितपाल बलियावाल ने मांग की कि:

  • भगवंत मान को तुरंत माफी मांगनी चाहिए
    शहीद परिवारों से, देश की महिलाओं से और हर उस भारतीय से जो इस देश से प्यार करता है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर रहने का अब कोई नैतिक अधिकार भगवंत मान के पास नहीं बचा है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

बलियावाल का दो टूक संदेश:

बलियावाल ने कहा —
यह केवल बीजेपी का अपमान नहीं है। यह भारत माता का, उसकी विधवाओं और वीर नारियों का, और उन सैनिकों का अपमान है जिन्होंने अपनी जान देश के लिए कुर्बान कर दी। अगर भगवंत मान में अब भी जरा सी भी संवेदना और ज़िम्मेदारी बची है, तो उन्हें पद से हट जाना चाहिए।”

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बता दिया कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और बलिदान के प्रतीकों को लेकर नेताओं को जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए। राजनीति और ह्यूमर की एक सीमा होनी चाहिए, खासकर जब बात देश की अस्मिता और शहीदों की हो।

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