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SIR Controversy पर CM Bhagwant Mann की कड़ी प्रतिक्रिया: “सवाल उठाना public Right, जवाब देना ECI की Duty”

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देश में इन दिनों चुनावों को लेकर माहौल गर्म है। लोग अपने वोटर लिस्ट, वोटिंग सिस्टम और Election Commission की चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कई राज्यों में शिकायतें आ रही हैं कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हो रही हैं, नाम काटे जा रहे हैं या सही तरीके से जवाब नहीं मिल रहा।
ऐसे माहौल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान पूरे देश में चर्चा का कारण बन गया है।

क्या है SIR और क्यों बढ़ा विवाद?

SIR यानी Special Intensive Revision, Election Commission द्वारा चलाया जाने वाला एक बड़ा अभियान है जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है —
जैसे नए नाम जोड़ना, गलतियां ठीक करना, पुराने और डुप्लीकेट नाम हटाना।

लेकिन इस बार SIR को लेकर देशभर में कई तरह की शिकायतें सामने आईं:

  • कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि enuine मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
  • लोगों का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी (transparent) नहीं है।
  • कहीं-कहीं कहा गया कि SIR “vote theft” का तरीका बन सकता है।
  • सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, इस मुद्दे पर बहस गर्म है।

कुछ राज्यों जैसे पंजाब और बंगाल में तो प्रदर्शन तक हुए। Booth Level Officers (BLOs) ने भी असंतोष जताया कि प्रक्रिया बहुत confusing और दबाव वाली है।

ECI ने अपनी तरफ से कहा है कि ये आरोप “highly exaggerated” यानी बढ़ा-चढ़ाकर बताए जा रहे हैं, और SIR नियमों के हिसाब से चल रहा है। लेकिन लोगों की चिंताएँ खत्म नहीं हो रही।

CM भगवंत मान की सीधी और कड़ी बात — “सबूत जनता क्यों दे?”

पंजाब के CM भगवंत मान ने साफ कहा कि जनता का चिंता करना गलत नहीं है, बल्कि जवाब न देना गलत है।

उन्होंने कहा: “SIR पर सवाल उठाना जनता का हक है। सबूत जनता क्यों दे? जवाब तो Election Commission को देना चाहिए।

मान का कहना है कि जब देश का आम वोटर — जो असली मालिक है — मतदान प्रक्रिया पर शक करने लगे, तो यह बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र जनता के भरोसे पर चलता है, और यह भरोसा टूटने नहीं देना चाहिए।

CM मान ने ECI से 3 बड़ी बातें कहीं

1 जनता को शक है तो जिम्मेदारी आपकी है

उन्होंने कहा कि अगर वोटर परेशान हैं या डर महसूस कर रहे हैं, तो यह ECI की जिम्मेदारी है कि उन्हें भरोसा दिलाए।
“चुनाव जनता का festival है, किसी पार्टी का event नहीं।”

2 सवाल पूछना अपराध नहीं अधिकार है

मान ने कहा कि जनता सवाल पूछेगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा। सवाल पूछना लोगों की right है।

3 मतदाता सूची पारदर्शी (transparent) होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि नाम हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया साफ-सुथरी और खुली होनी चाहिए।
लोगों को डर नहीं, भरोसा मिलना चाहिए।

पूरा देश इस पर चर्चा कर रहा है

यह मुद्दा अब सिर्फ पंजाब तक नहीं रहा।
कई राष्ट्रीय नेताओं — जैसे प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों — ने भी SIR पर सवाल उठाए हैं।
संसद के सत्र में भी इस पर बहस हुई और जवाब मांगे गए।

ECI की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर कहा गया कि सभी आरोप राजनीतिक हैं और SIR नियमों के अनुसार हो रहा है। लेकिन विपक्ष और जनता इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिख रही।

पंजाब में क्यों ज्यादा चिंता है?

पंजाब में विपक्ष और सरकार दोनों ही कह चुके हैं कि SIR को लेकर confusion और fear फैला है।
CM मान ने आरोप लगाया कि कहीं-कहीं genuine वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में बेचैनी है।

उन्होंने कहा:

चुप्पी समाधान नहीं है पारदर्शिता ही समाधान है।

लोगों को क्या चाहिए?

  • वोटर लिस्ट में transparency
  • किसी भी नाम हटाने का valid कारण
  • आसान और साफ communication
  • शिकायतों का तुरंत समाधान
  • ECI की ओर से भरोसा और clarity

यानी जनता सिर्फ यही चाहती है कि उनकी आवाज़ को सुना जाए और मतदान का अधिकार सुरक्षित रहे।

निष्कर्ष लोकतंत्र तभी मजबूत जब जनता को भरोसा हो

CM भगवंत मान का बयान इस समय इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने वही बात कही, जो लाखों भारतीय सोच रहे थे।
उन्होंने जनता की तरफ से आवाज उठाई और कहा कि:

  • जनता सवाल पूछे तो गलत नहीं
  • ECI जवाबदेह हो
  • लोकतंत्र का मूल “trust” कभी टूटना नहीं चाहिए

उनका संदेश इसलिए भी बड़ा है क्योंकि आज के समय में ऐसे नेता कम ही हैं जो खुलकर चुनाव प्रक्रिया की कमजोरियों पर बात करते हैं और जनता के अधिकारों को प्राथमिकता देते हैं।

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